मुंबई।
अभिनेता शारिब हाशमी का मानना है कि जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जिन्होंने इस संकट को पैदा करने में सबसे कम योगदान दिया है। अपनी नई लघु फिल्म "इट्स ओनली 47डिग्रीज़ सी" के जरिए वह इसी गंभीर मुद्दे को दर्शकों तक पहुंचाना चाहते हैं। उनका कहना है कि यह फिल्म केवल बढ़ती गर्मी की कहानी नहीं है, बल्कि समाज में मौजूद जलवायु असमानता (Climate Inequality) पर सोचने और चर्चा शुरू करने का एक प्रयास है।
निर्देशक तेज सिसोदिया के निर्देशन में बनी यह 15मिनट की लघु फिल्म लगातार बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी का असर उन लोगों पर दिखाती है, जो रोज़ाना खुले आसमान के नीचे काम करने को मजबूर हैं। फिल्म का निर्माण सिविक स्टूडियोज़ और दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की मोटली प्रोडक्शंस ने किया है।
फिल्म में शारिब हाशमी ने लक्ष्मण चौबे नाम के एक मुंबई ट्रैफिक पुलिसकर्मी की भूमिका निभाई है, जो भीषण लू और 47डिग्री तापमान के बीच अपनी ड्यूटी निभाता है। कहानी एक ही दिन की घटनाओं के माध्यम से यह दिखाती है कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ता है, जो सड़कों पर, निर्माण स्थलों पर या अन्य कठिन शारीरिक कार्यों में लगे रहते हैं।
शारिब हाशमी ने कहा कि जिन लोगों का कार्बन उत्सर्जन में सबसे कम योगदान है, वही आज सबसे ज्यादा कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन में हम सभी अपनी सुविधाओं का भरपूर उपयोग करते हैं और कहीं न कहीं इस समस्या का हिस्सा भी हैं। ऐसे में इस संकट का समाधान केवल सरकारों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, बल्कि हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
उन्होंने बताया कि फिल्म केवल समस्या को सामने नहीं रखती, बल्कि यह भी संकेत देती है कि छोटे-छोटे बदलावों से स्थिति बेहतर बनाई जा सकती है। उनके अनुसार कहानी का संदेश सीधा है, लेकिन इसकी प्रस्तुति संवेदनशील और संतुलित है, जिससे दर्शक भावनात्मक रूप से भी जुड़ सकें।
शारिब ने मुंबई के बदलते मौसम को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 1980के दशक में उनका बचपन मुंबई में बीता, तब यहां की गर्मियां अपेक्षाकृत सुखद होती थीं। आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। अब घर से बाहर निकलते ही तेज गर्मी और उमस का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों के सामने और भी गंभीर चुनौतियां खड़ी होंगी।
अभिनेता का मानना है कि जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने लोगों से निजी वाहनों और एयर कंडीशनर का अनावश्यक उपयोग कम करने, बिजली की बचत करने, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सीमित इस्तेमाल करने और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फैलाने की अपील की। उनका कहना है कि यदि हर व्यक्ति अपने स्तर पर छोटे-छोटे बदलाव अपनाए, तो इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे सकता है।
उन्होंने सार्वजनिक स्वच्छता को लेकर भी चिंता जताई। शारिब ने कहा कि अक्सर लोग कार की खिड़की से सड़क पर कचरा फेंक देते हैं, जो दुखद है। दिलचस्प बात यह है कि यही लोग विदेश जाने पर वहां के नियमों का पालन करते हैं और कहीं भी गंदगी नहीं फैलाते। उनका मानना है कि अपने देश में भी नागरिकों को वही जिम्मेदारी और अनुशासन दिखाना चाहिए।
स्वतंत्र और लघु फिल्मों में काम करने के अनुभव पर शारिब हाशमी ने कहा कि उन्हें छोटे बजट की फिल्मों का सहयोगात्मक माहौल बेहद पसंद है। उनके अनुसार पहली बार निर्देशन करने वाले फिल्मकार पूरी ऊर्जा और समर्पण के साथ काम करते हैं, जिससे पूरी टीम प्रेरित होती है। छोटी यूनिट में सभी लोग परिवार की तरह मिलकर काम करते हैं और यही वातावरण उन्हें सबसे अधिक पसंद है।
हाल ही में "इट्स ओनली 47 डिग्रीज़ सी" की मुंबई में विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की गई थी। यह फिल्म मामी इंडिपेंडेंट स्क्रीनिंग प्रोग्राम में भी प्रदर्शित की जा चुकी है। नसीरुद्दीन शाह, अनुष्का शाह, हरीश बोरा और तेज सिसोदिया द्वारा निर्मित यह लघु फिल्म फिलहाल पॉकेट फिल्म्स के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है।