नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर के निकट जुमे की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की मांग संबंधी याचिका पर सुनवाई के लिए 29जुलाई की तारीख तय की है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा नमाज के लिए जो वैकल्पिक स्थल उपलब्ध कराया गया है, वह विवादित परिसर से काफी दूर है, जिससे श्रद्धालुओं को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
यह मामला शुक्रवार को उस समय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष उल्लेखित किया गया, जब वरिष्ठ अधिवक्ता हूज़ेफ़ा अहमदी ने कहा कि याचिका सुनवाई सूची (कॉज लिस्ट) में शामिल नहीं थी। उन्होंने अदालत को बताया कि मुस्लिम पक्ष की ओर से पहले भी इस मुद्दे पर शीघ्र सुनवाई की मांग की गई थी और अब तक लगातार दो शुक्रवार की नमाज प्रभावित हो चुकी है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अहमदी ने अदालत में दलील दी कि राज्य सरकार द्वारा चिन्हित किया गया वैकल्पिक नमाज स्थल विवादित भोजशाला परिसर से लगभग 1.3किलोमीटर की दूरी पर है। उनका कहना था कि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्देशों की भावना के अनुरूप विवादित स्थल के समीप ही ऐसी जगह उपलब्ध कराई जानी चाहिए, जहां मुस्लिम समुदाय आसानी से जुमे की नमाज अदा कर सके।
उन्होंने अदालत से कहा, “हमारे पास हेलीकॉप्टर नहीं हैं। सड़क मार्ग से यह दूरी करीब 1.3किलोमीटर है। ऐसा प्रतीत होता है कि न्यायालय के आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है।” मुस्लिम पक्ष का तर्क था कि दूर स्थित स्थान पर नमाज अदा करना व्यावहारिक रूप से कठिन है और इससे अदालत के अंतरिम आदेश का उद्देश्य भी प्रभावित होता है।
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन दलीलों का विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि वैकल्पिक स्थल विवादित परिसर से लगभग 900मीटर की दूरी पर स्थित है और सरकार न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप समाधान तलाशने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले को भावनात्मक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि तथ्यों और प्रशासनिक व्यवस्था के आधार पर देखा जाना चाहिए।
इस पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अंतरिम आवेदन पर 29जुलाई को सुनवाई की जाएगी। अदालत ने संकेत दिया कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
इससे पहले भी सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया था कि राज्य प्रशासन को विवादित परिसर के निकट ही उपयुक्त वैकल्पिक स्थान तलाशने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा था कि प्रशासन इस दिशा में काम कर रहा है और जल्द ही कोई उपयुक्त समाधान सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
गौरतलब है कि 14जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की उन अपीलों पर सुनवाई की थी, जिनमें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें विवादित भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर माना गया था। उस दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने अंतरिम व्यवस्था के तहत राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि अंतिम निर्णय आने तक हर शुक्रवार दोपहर 1बजे से 3बजे के बीच नमाज अदा करने के लिए विवादित परिसर के निकट एक अलग खुला स्थान उपलब्ध कराया जाए।
भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से कानूनी और धार्मिक विवाद जारी है। एक ओर हिंदू पक्ष इसे देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे ऐतिहासिक कमाल मौला मस्जिद से जुड़ा स्थल बताता है। अब इस मामले में सभी की निगाहें 29 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां वैकल्पिक नमाज स्थल और अंतरिम व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अदालत विचार करेगी।