Nephew Akash Anand immature in Mayawati's eyes; Explained the difference between the words and actions of the Sangh
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर दिए गए बयानों का संज्ञान लेते हुए बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि संघ की कथनी और करनी में भारी अंतर है।
पार्टी की ओर से जारी बयान के मुताबिक, मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी की किसी भी बड़ी जिम्मेदारी से दूर रखने का फैसला करते हुए उनसे (आकश से) और अधिक परिपक्व होने की अपेक्षा की।
उन्होंने कांशीराम के सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा, ‘‘जिस तरह बसपा संस्थापक ने अपने परिवार एवं रिश्तेदारों को केवल पार्टी के कामकाज की इजाजत दी थी, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ाने या सरकार बनने पर कोई भी पद देने के वह खिलाफ थे, ठीक उसी सिद्धांत पर अमल करते हुए मैंने भी अपने भतीजे को पार्टी का कामकाज सौंपा है, लेकिन उन्हें (आकाश को) अभी और परिपक्व होने की जरूरत है तथा तब तक उन्हें पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी देना उचित नहीं होगा।’’
बयान के अनुसार, अब बसपा ने पूरे देश में सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले ही लड़ने का फैसला लिया है।
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बृहस्पतिवार को यहां पार्टी की अखिल भारतीय स्तर की हुई बैठक में पार्टी से संबंधित पिछले कार्यो की समीक्षा करके खामियों को दूर करने तथा भविष्य के लिए पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों को दिये गये ज़रूरी दिशा-निर्देशों का पूरी ईमानदारी एवं निष्ठा के साथ अनुपालन करने की भी सख़्त हिदायत दी।