सोशल मीडिया पोस्ट पर नेहा सिंह राठौर को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 07-01-2026
Neha Singh Rathore gets interim relief from arrest over social media posts.
Neha Singh Rathore gets interim relief from arrest over social media posts.

 

नई दिल्ली

उच्चतम न्यायालय ने लोक गायिका नेहा सिंह राठौर को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। यह आदेश उस मामले में आया है जिसमें राठौर पर सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह पोस्ट कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को निशाना बनाती दिख रही थीं।

न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी करते हुए कहा कि गायिका के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। न्यायालय ने साथ ही राठौर को जांच अधिकारी के सामने पेश होने और जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया।

इससे पहले, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने पिछले साल 5 दिसंबर को गायिका की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। उस याचिका में राठौर ने प्राथमिकी रद्द करने का अनुरोध किया था, लेकिन न्यायालय ने पाया कि पिछली पीठ के निर्देशों के बावजूद राठौर ने जांच में सहयोग नहीं किया था।

27 अप्रैल 2025 को लखनऊ के हजरतगंज पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी में राठौर पर विशेष धार्मिक समुदाय को निशाना बनाने और देश की एकता को खतरे में डालने का आरोप लगाया गया था। शिकायतकर्ता अभय प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि राठौर बार-बार धार्मिक आधार पर एक समुदाय को दूसरे समुदाय के खिलाफ भड़काने का प्रयास कर रही हैं। राठौर ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत और निराधार बताया।

न्यायालय ने मामले में स्पष्ट किया कि राठौर की गिरफ्तारी की कार्रवाई इस अंतरिम आदेश के तहत तत्काल प्रभाव से नहीं की जा सकती। साथ ही, अदालत ने जांच प्रक्रिया के दौरान उनके सहयोग और पेश होने के महत्व पर जोर दिया।

इस आदेश से गायिका को अस्थायी सुरक्षा तो मिली है, लेकिन जांच जारी रहेगी और सभी पक्षों को न्यायालय के समक्ष अपनी दलील पेश करने का अवसर मिलेगा। यह मामला सोशल मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को उजागर करता है और दर्शाता है कि न्यायिक प्रक्रिया में व्यक्तिगत अधिकारों और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।