नई दिल्ली
NEET-UG 2026 पेपर लीक से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को संस्थागत रूप से मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए NTA के पास सुरक्षित बुनियादी ढांचा, समर्पित परीक्षा केंद्र, साइबर सुरक्षा प्रणाली, संस्थागत विशेषज्ञता और परीक्षा संचालन के लिए स्थायी तंत्र होना चाहिए।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अलोक अराधे की पीठ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के सचिव को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इसमें के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों और नंदन नीलेकणी समिति द्वारा सुझाए गए सुधारों को लागू करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देने को कहा गया है।
पीठ ने कहा कि उसका उद्देश्य देश में ऐसी मजबूत परीक्षा संस्था सुनिश्चित करना है, जो विशेषज्ञता को बनाए रख सके और तकनीकी बदलावों के अनुरूप खुद को ढाल सके। कोर्ट ने कहा, “एक जीवंत व्यवस्था और संस्थागतकरण की जरूरत है।”
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी संस्था को संस्थागत रूप नहीं दिया जाता है तो अनुभवी अधिकारियों के तबादले के साथ पूरी विशेषज्ञता और अनुभव भी खत्म हो जाता है। परीक्षा व्यवस्था में तकनीकी बदलावों के साथ-साथ संस्थागत स्मृति और विशेषज्ञता बनाए रखना भी जरूरी है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी चिंता केवल प्रश्नपत्रों की तैयारी, छपाई, परिवहन और वितरण के मौजूदा सुरक्षा उपायों तक सीमित नहीं है। वह NTA के बुनियादी ढांचे, कर्मचारियों, तकनीक और संस्थागत अनुभव को स्थायी रूप से मजबूत करने पर भी ध्यान दे रहा है।
न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि परीक्षा संचालन के संस्थागतकरण के लिए सुरक्षित कार्यालय परिसर, गोपनीय परिचालन ढांचा और साइबर सुरक्षा जैसी व्यवस्थाएं जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि समिति ने करीब 10 अलग-अलग वर्टिकल बनाने की सिफारिश की है, जिनमें परीक्षण केंद्र और केंद्रीय नेटवर्क ऑपरेटर जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
NEET-UG 2024 पेपर लीक विवाद के बाद पूर्व ISRO अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया था। समिति ने अक्टूबर 2024 में शिक्षा मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें NTA में सुधार और सार्वजनिक परीक्षाओं की सुरक्षा व विश्वसनीयता मजबूत करने के लिए 101 सिफारिशें की गई थीं।
इन सिफारिशों में परीक्षा बुनियादी ढांचे, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, तकनीक, मानव संसाधन और NTA के भीतर संस्थागत तंत्र से जुड़े उपाय शामिल हैं।
केंद्र और NTA की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को प्रश्नपत्रों की तैयारी, छपाई, परिवहन और वितरण के लिए लागू सुरक्षा उपायों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि प्रश्नपत्र कई स्तरों की मॉडरेशन प्रक्रिया से तैयार होता है। उदाहरण के तौर पर 100 प्रश्नों वाले फिजिक्स पेपर के लिए पहले करीब 500 प्रश्नों का बैंक तैयार किया जाता है। इसके बाद अलग-अलग मॉडरेटर प्रश्नों का चयन कर चार प्रश्नपत्र तैयार करते हैं, जिनमें से दो को अंततः NTA के महानिदेशक द्वारा चुना जाता है।
मेहता के अनुसार अंतिम प्रश्नपत्र की पहचान तब तक गुप्त रहती है, जब तक उसे CCTV और CISF की निगरानी वाले चिन्हित प्रिंटिंग प्रेस तक सीलबंद बॉक्स में नहीं भेज दिया जाता। प्रिंटिंग प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होती है और सीलबंद बॉक्स खोले जाने के बाद बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक रहती है।
उन्होंने बताया कि प्रश्नपत्रों को न खोले जा सकने वाले लॉक वाले लोहे के बक्सों में पैक किया जाता है और GPS से ट्रैक किए जाने वाले वाहनों में भेजा जाता है। प्रश्नपत्रों के दो सेट अलग-अलग बक्सों में बैंक के स्ट्रॉन्ग रूम में रखे जाते हैं, जो आमतौर पर SBI या Canara Bank की शाखाओं में होते हैं।
परीक्षा की सुबह NTA के महानिदेशक शहर समन्वयक को इस्तेमाल किए जाने वाले सेट की जानकारी देते हैं। इसके बाद जिला अधिकारियों की मौजूदगी में प्रश्नपत्रों को मोटरकेड के जरिए परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता है और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाती है।
कोर्ट ने कहा कि ये सुरक्षा उपाय पहले से ही राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों के दायरे में आते हैं। इसलिए अब यह जानना जरूरी है कि NTA को संस्थागत बनाने के लिए वास्तव में क्या कदम उठाए गए हैं।
पीठ ने प्रश्नपत्रों की सीलिंग के लिए स्थायी समिति, वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति और संस्थागत विशेषज्ञता विकसित करने से जुड़ी सिफारिशों के क्रियान्वयन पर भी जानकारी मांगी।
कोर्ट ने कहा कि प्रश्नपत्रों की सीलिंग की प्रक्रिया एक स्थायी समिति के जरिए होनी चाहिए और नियमित हलफनामों के माध्यम से यह बताया जाना चाहिए कि कितने महानिदेशक और वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा व्यवस्था में “संस्थागत स्मृति” और “संस्थागत विशेषज्ञता” बनाए रखने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि अनुसंधान एवं विकास (R&D) से जुड़ा बुनियादी ढांचा भी विकसित किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए एक संप्रभु डेटाबेस और सुरक्षित भंडारण ढांचे के निर्माण पर भी सवाल किया। उसने कहा कि सुरक्षा से जुड़े मामलों के लिए निदेशक स्तर के अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, ताकि व्यवस्था में मौजूद खामियों की पहचान की जा सके।
पीठ ने भारतीय भाषाओं में प्रश्नपत्रों के अनुवाद के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर निर्भरता को लेकर भी सवाल उठाया। कोर्ट ने पूछा कि क्या प्रश्नपत्रों के अनुवाद के लिए AI का इस्तेमाल जरूरी है और कहा कि भारत में इसके लिए तकनीक पर आंख मूंदकर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है।
तुषार मेहता ने बताया कि अनुवाद की प्रक्रिया फिलहाल मनुष्यों द्वारा की जा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि नंदन नीलेकणी समिति बुधवार को बैठक कर रही है और राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को और बेहतर बनाने के लिए सुधारों पर काम करेगी।
FAIMA की ओर से पेश अधिवक्ता तन्वी दुबे ने बताया कि राधाकृष्णन समिति ने परीक्षाओं को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने की सिफारिश की थी, लेकिन यह अभी विचाराधीन है। इस पर मेहता ने कहा कि पूरी तरह CBT प्रणाली अपनाने से भी कुछ नए जोखिम पैदा हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसका मुख्य फोकस NTA का संस्थागतकरण है, जिसमें बुनियादी ढांचा, मानव संसाधन और तकनीकी जरूरतें शामिल हैं। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद किसी तारीख पर होगी।