आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
झारखंड की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा ने बुधवार को बताया कि प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को झारखंड के धनबाद जिले से गिरफ्तार किया गया है। उस पर 2.20 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम था और वह 175 मामलों में वांछित था।
डीजीपी ने दावा किया कि देश के सबसे वांछित नक्सलियों में शामिल लोगों की गिरफ्तारी के साथ राज्य में नक्सलवाद का लगभग खात्मा हो गया है। उन्होंने बताया कि 65 वर्षीय बेसरा को मंगलवार शाम ‘ऑपरेशन दौड़ा पहाड़’ के दौरान धनबाद जिले के बरवड्डा थानाक्षेत्र के मनियाडीह इलाके से गिरफ्तार किया गया।
गिरिडीह जिले के मदनाडीह गांव का निवासी बेसरा ‘‘प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) का एकमात्र सक्रिय शीर्ष स्तर का पोलित ब्यूरो सदस्य था।’’
पुलिस अधिकारी ने बताया, “इस शीर्ष माओवादी पर झारखंड और ओडिशा सरकारों की ओर से कुल 2.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। वह झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में दर्ज 175 मामलों में वांछित था।”
डीजीपी ने बताया कि अभियान के दौरान दो अन्य नक्सलियों—15 लाख रुपये का इनामी मेहनत उर्फ मोछू और गौरव को भी गिरफ्तार किया गया। उनके अनुसार, तीनों कुल 320 आपराधिक मामलों में वांछित थे।
पुलिस के अनुसार, सागर दा और भास्कर दा के नाम से भी जाना जाने वाला बेसरा वर्ष 1980 में प्रतिबंधित संगठन में शामिल होकर 2003 में उसकी केंद्रीय समिति का सदस्य बना था।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि बेसरा ने झारखंड और पड़ोसी राज्यों में माओवादी नेटवर्क के विस्तार में अहम भूमिका निभाई थी। उसने राज्य में सशस्त्र दस्तों के गठन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
झारखंड पुलिस महानिरीक्षक (अभियान) नरेंद्र सिंह ने कहा कि गिरफ्तार किए गए तीनों नक्सली कई बड़े हमलों में शामिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इनमें बिहार के 2005 के जहानाबाद जेल से भागने का मामला, कई बैंक डकैती, बड़े पैमाने पर हथियार और गोला-बारूद की लूट तथा कई आईईडी विस्फोट शामिल हैं।