Muttahida Majlis-e-Ulema expresses concern over collection of information regarding mosques in Kashmir
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाली मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) ने मंगलवार को कश्मीर में मस्जिदों और उनकी प्रबंधन समितियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि यह मौलिक अधिकारों की संविधान के तहत प्रदत्त गारंटी का “पूर्ण उल्लंघन” है।
जम्मू कश्मीर में इस्लामी धार्मिक संगठनों के समूह एमएमयू ने उपराज्यपाल प्रशासन से धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता का सम्मान करने और नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता, निजता और गरिमा की संवैधानिक गारंटी को बनाए रखने के लिए इस प्रक्रिया को बिना देरी किए वापस लेने का आग्रह भी किया।
अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल "सफेदपोश" आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ होने के बाद कश्मीर में मस्जिदों, मदरसों और इन धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन से जुड़े व्यक्तियों के संबंध में जानकारी इकट्ठा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
एमएमयू ने एक बयान में कहा, “एमएमयू को पता चला है कि पुलिस द्वारा कई पन्नों के विस्तृत प्रपत्र वितरित किए जा रहे हैं जिनमें निजी पहचान विवरण, पारिवारिक विवरण, वित्तीय जानकारी, डिजिटल और सोशल मीडिया प्रोफाइल, फोन आईएमईआई विवरण और मस्जिदों के संचालन व प्रबंधन से जुड़े सभी लोगों के अन्य आंकड़ों सहित अत्यधिक व्यक्तिगत और संवेदनशील जानकारी मांगी जा रही है।”
इसने कहा, “इसके अलावा यह बताने को भी कहा गया है कि मस्जिदें किस फिरके - बरेलवी, हनफी, देवबंदी या अहले-हदीस - से वैचारिक रूप से संबद्ध हैं। इस तरह के अभूतपूर्व और दखलंदाजी भरे आंकड़े संग्रह अभियान ने धार्मिक संस्थानों, इमाम खतीबों और आम जनता के बीच व्यापक चिंता पैदा कर दी है।”
इसमें कहा गया है कि यह कवायद संविधान के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों की गारंटी और निजता तथा व्यक्तिगत जानकारी के अधिकार का “पूर्ण उल्लंघन” है।