आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
इस सप्ताह जारी किये गये नए डेटा से पता चलता है कि ऑस्ट्रेलिया के 54 प्रतिशत बच्चे और किशोर निजी एवं सामाजिक कारणों से कृत्रिम मेधा (एआई) उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इसमें व्यक्तिगत समस्याओं को लेकर सलाह लेना, भावनाओं के बारे में चर्चा करना और किशोरों के लिए भूमिका निभाने तथा रोमांटिक बातचीत जैसे प्रयोग करना भी शामिल है।
जटिल स्थितियों से गुजरना एवं उनसे निपटना (बच्चों की) इस बढ़ती उम्र का एक सामान्य हिस्सा है। लेकिन जहां एआई नए मौके देता है, वहीं यह नए जोखिम भी पैदा करता है।
तो माता-पिता और बड़ों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?