Manufacturing, auto sectors drive India's logistics and industrial space in H1 2026: Report
नई दिल्ली
कुशमैन एंड वेकफील्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में भारत के लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल रियल एस्टेट मार्केट में मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल और थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स (3PL) कंपनियों की वजह से मांग बनी रही। यह देश भर में बढ़ती इंडस्ट्रियल एक्टिविटी और सप्लाई चेन की ज़रूरतों को दिखाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि टॉप आठ शहरों में कुल लीज़िंग (किराए पर जगह लेना) 2026 की पहली छमाही में 36.2 मिलियन स्क्वायर फीट (MSF) तक पहुंच गई, जो किसी कैलेंडर वर्ष की पहली छमाही के लिए अब तक का सबसे ज़्यादा आंकड़ा है। वेयरहाउसिंग और इंडस्ट्रियल सुविधाओं में ज़बरदस्त एक्टिविटी से इस मांग को बढ़ावा मिला। कुल लीज़िंग में साल-दर-साल 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 2025 की दूसरी छमाही की तुलना में 2 प्रतिशत ज़्यादा थी।
वेयरहाउस लीज़िंग 24.3 MSF के साथ सबसे बड़ा सेगमेंट बना रहा, जो कुल लीज़िंग एक्टिविटी का 67 प्रतिशत था, जबकि साल की पहली छमाही में इंडस्ट्रियल लीज़िंग बढ़कर लगभग 12 MSF हो गई। थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स (3PL) ऑपरेटर्स ने तेज़ी बनाए रखी, जिनका हिस्सा 12.2 MSF लीज़िंग और कुल मांग का 34 प्रतिशत था। इसके बाद इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग (E&M) कंपनियों का नंबर रहा, जिन्होंने 10.2 MSF लीज़िंग की और कुल लीज़िंग में 28 प्रतिशत का योगदान दिया। इन दोनों सेक्टरों ने मिलकर इस अवधि के दौरान कुल लीज़िंग का 60 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा लिया। ऑटोमोबाइल सेक्टर भी ग्रोथ के एक मुख्य ड्राइवर के तौर पर उभरा, जिसने 4.8 MSF लीज़िंग या कुल मांग का 13 प्रतिशत हिस्सा लिया। ऑटोमोबाइल कंपनियों द्वारा लीज़िंग 2025 की पहली छमाही की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई।
आठ शहरों में दिल्ली NCR में सबसे ज़्यादा लीज़िंग एक्टिविटी (8.7 MSF) दर्ज की गई, इसके बाद चेन्नई (6.1 MSF) और पुणे (5.9 MSF) का स्थान रहा। दिल्ली NCR में साल-दर-साल सबसे ज़्यादा 69 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई, जबकि चेन्नई और पुणे में क्रमशः 39 प्रतिशत और 32 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई। इस रिपोर्ट के नतीजों पर बात करते हुए, कुशमैन एंड वेकफील्ड के लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल सर्विसेज के मैनेजिंग डायरेक्टर अभिषेक भूटानी ने कहा, "भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं वाले बाहरी माहौल के बावजूद, जगह लेने वालों (ऑक्युपायर) की मांग मज़बूत बनी हुई है। हालांकि हाल के महीनों में कंपनियों ने फ़ैसले लेने में ज़्यादा सोच-समझकर कदम उठाए हैं, लेकिन उनके विस्तार की योजनाएँ पूरी तरह से पटरी पर हैं। यह भारत की मैन्युफैक्चरिंग और खपत की कहानी में लंबे समय के भरोसे को दिखाता है।"
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 की दूसरी छमाही में ई-कॉमर्स, रिटेल और ऑटोमोबाइल सेक्टर की मौसमी गतिविधियों से मांग को सहारा मिलने की उम्मीद है, हालांकि वैश्विक घटनाक्रम कारोबार से जुड़े फ़ैसलों की रफ़्तार पर असर डालते रह सकते हैं।