खानकाह मुनमिया: पटना की इस खानकाह में मिलती है शिक्षा, इलाज और मदद

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 04-08-2026
Khanqah Munamiya: This Khanqah in Patna offers education, medical treatment, and assistance.
Khanqah Munamiya: This Khanqah in Patna offers education, medical treatment, and assistance.

 

महफूज आलम | पटना

आज के समय में जब हमारा समाज आर्थिक असमानता, शिक्षा की कमी और आपसी तनाव जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, तब धार्मिक और आध्यात्मिक संस्थाओं की जिम्मेदारी बहुत बढ़ जाती है। बिहार की राजधानी पटना के पटना सिटी स्थित मीठन घाट की ऐतिहासिक खानकाह मुनमिया इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही है। यह खानकाह सिर्फ इबादत और रूहानी मार्गदर्शन का केंद्र नहीं है। यह गरीबों की मदद, मुफ्त इलाज, बच्चों की शिक्षा और आपसी भाईचारे की मिसाल बनकर उभरी है।

सूफी संतों की परंपरा हमेशा से बिना किसी भेदभाव के हर इंसान से प्यार करने और उसकी सेवा करने की रही है। खानकाह मुनमिया इसी परंपरा को आज के दौर में नए तरीके से आगे बढ़ा रही है। यहाँ किसी का धर्म या जाति नहीं पूछी जाती। संकट में फंसे हर व्यक्ति की मदद की जाती है।

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संस्था 'सिलसिला' की शुरुआत और उसके मुख्य मकसद

समाजिक और कल्याणकारी कामों को बेहतर ढंग से चलाने के लिए खानकाह ने साल 1999 में एक संगठन बनाया। इसका नामसिलसिलारखा गया। यह एक सामाजिक, शैक्षणिक और साहित्यिक संगठन है।

यह संस्था खानकाह मुनमिया मीठन घाट के सज्जादा नशीन मौलाना डॉ. शमीमुद्दीन अहमद मुनमी की देखरेख में काम करती है। मौलाना डॉ. शमीमुद्दीन अहमद मुनमी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने मान इस्लामिक विद्वान हैं। वहीं, प्रोफेसर मसऊदुर रहमान इस संस्था के सचिव के रूप में काम संभाल रहे हैं।

संस्था के सचिव प्रोफेसर मसऊदुर रहमान का कहना है कि सिलसिला संगठन पूरी तरह आम लोगों के सहयोग से चलता है। इसके लिए सरकार से कोई वित्तीय मदद नहीं ली जाती। संगठन का मुख्य मकसद समाज के कमजोर तबकों तक मदद पहुंचाना है। इसमें ऐसे परिवारों पर विशेष ध्यान दिया जाता है जो गरीबी के कारण अपने बच्चों को पढ़ा नहीं पाते या बीमारी का इलाज कराने में असमर्थ होते हैं।

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शिक्षा से ही संभव है समाज का वास्तविक विकास

शिक्षा के महत्व पर बात करते हुए प्रोफेसर मसऊदुर रहमान बताते हैं कि एक पढ़ा लिखा समाज ही सही निर्णय ले सकता है। अशिक्षा समाज को भीतर से कमजोर करती है। इससे गलत परंपराएं और गलतफहमियां जन्म लेती हैं।

इस्लाम में ज्ञान हासिल करना हर इंसान का कर्तव्य माना गया है। इसलिए हर बच्चे को पढ़ने का मौका मिलना चाहिए। सिलसिला संस्था यह सुनिश्चित करती है कि पैसों की तंगी किसी बच्चे की पढ़ाई में रुकावट न बने।

हर साल यह संगठन लगभग 100 जरूरतमंद छात्रों को आर्थिक मदद देता है। इसमें स्कूली बच्चों से लेकर कॉलेज और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई करने वाले छात्र शामिल हैं। संस्था बच्चों की स्कूल फीस, परीक्षा फीस, कोचिंग का खर्च और एडमिशन में लगने वाले पैसों का भुगतान करती है। मैट्रिक से लेकर स्नातक स्तर तक की पढ़ाई के लिए लगातार आर्थिक सहयोग दिया जाता है।

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उच्च और व्यावसायिक शिक्षा में बराबरी के अवसर

अक्सर देखा जाता है कि गरीब परिवार के होनहार बच्चे पैसों के अभाव में डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना छोड़ देते हैं। सिलसिला संस्था इस खाई को पाटने की कोशिश कर रही है।संस्था एमबीबीएस, इंजीनियरिंग और डिप्लोमा जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले गरीब छात्रों को भी वित्तीय मदद देती है।

प्रोफेसर रहमान मानते हैं कि कोई एक संस्था अकेले पूरी समस्या को खत्म नहीं कर सकती। लेकिन अगर निष्पक्ष और ईमानदार प्रयास किए जाएं तो बहुत से युवाओं का जीवन बदल सकता है।

आधुनिक समय में कंप्यूटर और तकनीकी शिक्षा

आज के समय में तकनीक की जानकारी होना बेहद जरूरी हो गया है। कंप्यूटर के बिना बेहतर रोजगार पाना कठिन है। इस बात को समझते हुए सिलसिला ने साल 2018 में एक कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआत की।

इस सेंटर में डीसीएस नाम का छह महीने का कंप्यूटर कोर्स कराया जाता है। इसके लिए मात्र 500 रुपये की बेहद कम फीस ली जाती है। खास बात यह है कि यहाँ सभी धर्मों के छात्र एक साथ बैठकर पढ़ाई करते हैं। जो छात्र 500 रुपये देने में भी पूरी तरह असमर्थ होते हैं, उन्हें बिल्कुल मुफ्त कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया जाता है।

शिक्षा के साथ नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों का निर्माण

खानकाह मुनमिया का मानना है कि केवल किताबी ज्ञान काफी नहीं है। शिक्षा के साथ साथ अच्छे चरित्र का होना भी उतना ही जरूरी है। मौलाना डॉ. शमीमुद्दीन अहमद मुनमी के मार्गदर्शन में छात्रों के लिए कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

इनमें निबंध प्रतियोगिताएं, लेखन स्पर्धाएं और सामान्य ज्ञान की परीक्षाएं शामिल हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य छात्रों में नैतिक मूल्यों और इस्लामिक ज्ञान की सही समझ विकसित करना है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाता है, जिससे उनका मनोबल बढ़ता है।

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स्वास्थ्य सेवाएं: गरीबों के लिए मुफ्त चिकित्सा शिविर

गरीब परिवारों के लिए बीमारी का इलाज कराना एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। कई बार जानकारी के अभाव में भी लोग अपनी बीमारी को छिपाते रहते हैं।

इस समस्या को दूर करने के लिए सिलसिला संस्था हर हफ्ते मेडिकल कैंप लगाती है। इन कैंपों में बिना किसी धार्मिक या सामाजिक भेदभाव के लोगों की मुफ्त जांच की जाती है। विशेषज्ञ डॉक्टर मरीजों का परीक्षण करते हैं और जरूरत पड़ने पर आगे के इलाज का प्रबंध भी करते हैं।

कोविड 19 महामारी के कठिन समय में भी सिलसिला संस्था ने बड़े पैमाने पर राहत काम किए थे। प्रभावित परिवारों को राशन और जरूरी सामान पहुंचाया गया था। इसके अलावा संस्था मरीजों और शवों को ले जाने के लिए रियायती दरों पर एम्बुलेंस सेवा भी चलाती है। जो परिवार एम्बुलेंस का किराया देने की स्थिति में नहीं होते, उनके लिए यह सेवा पूरी तरह मुफ्त रहती है।

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अंतरधार्मिक संवाद और आपसी भाईचारे की मजबूती

खानकाह मुनमिया का सबसे महत्वपूर्ण काम समाज में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना है। सिलसिला संस्था समय समय पर अंतरधार्मिक संवाद कार्यक्रमों का आयोजन करती है।

इन कार्यक्रमों में विभिन्न धर्मों के लोग एक मंच पर एकत्र होते हैं। आपस में बातचीत से गलतफहमियां दूर होती हैं और एक दूसरे के प्रति सम्मान बढ़ता है। प्रोफेसर मसऊदुर रहमान का कहना है कि सूफी संतों ने हमेशा सिर्फ उपदेश देने के बजाय अपने आचरण से प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया है।

भारत की असली ताकत उसकी सांस्कृतिक विविधता और आपसी प्रेम में निहित है। खानकाह मुनमिया मीठन घाट हर धर्म और हर वर्ग के लोगों के लिए अपने दरवाजे हमेशा खुले रखती है। यहाँ आने वाले हर व्यक्ति को नैतिक और व्यावहारिक मदद दी जाती है।

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साहित्यिक गतिविधियां और रमजान की सर्वसम्मत समय सारणी

शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवाओं के साथ साथ सिलसिला संस्था साहित्यिक और बौद्धिक गतिविधियों में भी सक्रिय है। संस्था महान विद्वानों और साहित्यकारों की याद में सेमिनार और विचार गोष्ठियां आयोजित करती है।

इसके अलावा धार्मिक, शैक्षणिक और साहित्यिक विषयों पर पुस्तकें भी प्रकाशित की जाती हैं। इन किताबों को छात्रों और युवाओं में बांटा जाता है ताकि वे समाज और धर्म के सही मूल्यों को समझ सकें।

संस्था का दफ्तर खानकाह मुनमिया मीठन घाट के परिसर में स्थित है, जहाँ से इन सभी सामाजिक कामों का संचालन होता है।पवित्र रमजान के महीने में सिलसिला संस्था पटना शहर के लिए एक संयुक्त रमजान समय सारणी तैयार करती है। इसके लिए शहर के सभी प्रमुख मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाती है। इस सर्वसम्मत समय सारणी का पालन पूरे शहर में सालों से किया जा रहा है। यह पहल समाज में एकता और आपसी सहयोग का सुंदर उदाहरण है।

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जनसहयोग और जकात के माध्यम से समाज सेवा

सिलसिला संगठन अपने किसी भी काम के लिए आम जनता से चंदा इकट्ठा नहीं करता। इसके सभी प्रोजेक्ट संस्था के सदस्यों और समाज के दानदाताओं के सहयोग से चलते हैं।रमजान के महीने में मिलने वाले सदका और जकात के अंश का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ गरीबों के कल्याण में किया जाता है। जरूरतमंदों को कानूनी और वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है।

पटना की खानकाह मुनमिया का यह प्रयास दिखाता है कि अगर धार्मिक संस्थाएं अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझें, तो समाज की कई समस्याओं का समाधान खुद ब खुद हो सकता है। सूफी परंपरा की यह अलख आज भी समाज को एक नया रास्ता दिखा रही है।