मनीष तिवारी का नए दल-बदल कानून पर स्थगन प्रस्ताव

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 21-07-2026
Manish Tewari moves Adjournment Motion Notice in Lok Sabha seeking discussion on new anti-defection law
Manish Tewari moves Adjournment Motion Notice in Lok Sabha seeking discussion on new anti-defection law

 

नई दिल्ली 
 
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने मंगलवार को लोकसभा में 'काम रोको प्रस्ताव' (Adjournment Motion) का नोटिस दिया। उन्होंने 'प्रश्न काल', 'शून्य काल' और दिन के बाकी सभी कामकाज को रोककर एक नए 'दल-बदल विरोधी कानून' की ज़रूरत पर चर्चा करने की मांग की। यह कानून ऐसे 'बड़े पैमाने पर होने वाले राजनीतिक दल-बदल' को रोकने के लिए होना चाहिए जो सिर्फ़ मौके का फ़ायदा उठाने के लिए किए जाते हैं, लेकिन साथ ही संसद और विधानसभाओं के अंदर सही और जायज़ असहमति के लिए भी जगह बनाए रखे।
 
लोकसभा महासचिव को दिए अपने नोटिस में तिवारी ने कहा कि प्रस्तावित कानून को "मौके का फ़ायदा उठाने के लिए किए जाने वाले और बिना किसी असली वैचारिक या नीतिगत मतभेद के होने वाले बड़े पैमाने पर राजनीतिक दल-बदल" पर रोक लगानी चाहिए, और साथ ही संसद और विधानसभाओं के अंदर और बाहर "ईमानदार और आलोचनात्मक असहमति" के लिए भी जगह देनी चाहिए।
 
तिवारी ने अपने नोटिस में कहा, "मैं प्रस्ताव करता हूं कि यह सदन 'प्रश्न काल', 'शून्य काल' और दिन के बाकी सभी कामकाज को रोककर एक नए 'दल-बदल विरोधी कानून' की ज़रूरत पर चर्चा करे। यह कानून ऐसे 'बड़े पैमाने पर होने वाले राजनीतिक दल-बदल' को रोके जो सिर्फ़ मौके का फ़ायदा उठाने के लिए किए जाते हैं और जिनमें कोई असली वैचारिक या नीतिगत मतभेद नहीं होता, लेकिन साथ ही संसद और विधानसभाओं के अंदर और बाहर 'ईमानदार और आलोचनात्मक असहमति' के लिए भी जगह बनाए रखे।" उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि दिन का कामकाज रोक दिया जाए और इस मुद्दे पर पूरी चर्चा की जाए, जिसे उन्होंने बहुत ज़रूरी मामला बताया।
 
कांग्रेस सांसद ने कहा, "इसलिए मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि आज का कामकाज रोक दिया जाए और इस बहुत ज़रूरी मामले पर पूरी चर्चा की जाए।" यह नोटिस 21 जुलाई को होने वाली लोकसभा की बैठक के लिए 20 जुलाई को दिया गया था। तिवारी की यह मांग दल-बदल और मौजूदा दल-बदल विरोधी कानून के असर को लेकर फिर से शुरू हुई राजनीतिक बहस के बीच आई है। उनका तर्क है कि हालांकि मौके का फ़ायदा उठाने के लिए किए जाने वाले राजनीतिक दल-बदल को हतोत्साहित किया जाना चाहिए, लेकिन किसी भी नए कानून में सांसदों के ईमानदार और आलोचनात्मक असहमति जताने के अधिकार की भी रक्षा की जानी चाहिए।
 
हाल ही में राजनीतिक माहौल में फिर से उथल-पुथल देखी गई, जब दो बड़ी विपक्षी पार्टियों - महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) - को बड़ी अंदरूनी फूट का सामना करना पड़ा। जहां सत्ताधारी गठबंधनों ने इन घटनाओं को अपने बढ़ते प्रभाव का सबूत बताया, वहीं विपक्षी नेताओं ने इन्हें धोखा, राजनीतिक इंजीनियरिंग और लोकतांत्रिक नियमों के लिए खतरा करार दिया। इस बीच, संसद का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू हुआ और यह 13 अगस्त तक चलेगा।