ममता ने आई-पैक मामले की जांच में बाधा डालने के लिए राज्य तंत्र का इस्तेमाल किया : ईडी

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 23-04-2026
Mamata used state machinery to obstruct investigation into I-PAC case: ED
Mamata used state machinery to obstruct investigation into I-PAC case: ED

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाने का आरोप लगाते हुए, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2,700 करोड़ रुपये के कोयला तस्करी मामले में आई-पैक के खिलाफ उसकी जांच में बाधा डालने के लिए राज्य तंत्र का इस्तेमाल किया।
 
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ के समक्ष ईडी और उसके अधिकारी रॉबिन बंसल की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को प्राथमिकी दर्ज करने और मामले की जांच का निर्देश देने का अनुरोध किया।
 
अदालत ईडी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें आरोप लगाया गया है कि धन शोधन जांच के संबंध में आठ जनवरी को कोलकाता में राजनीतिक परामर्श फर्म ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (आई-पैक) के कार्यालय की तलाशी के दौरान बनर्जी और अन्य राज्य अधिकारियों ने बाधा डाली थी।
 
ईडी का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने भारी पुलिस बल के साथ व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करते हुए तलाशी रोक दी और संघीय अधिकारियों द्वारा एकत्र किए गए सबूतों को जब्त कर लिया।
 
कार्यवाही की शुरुआत सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी के बीच तीखी बहस से हुई।
 
गुरुस्वामी ने ईडी पर अदालत को ‘‘राजनीतिक अभियान में सोशल मीडिया हथियार’’ के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
 
सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ‘‘मैं सड़क पर लड़ने वाले की तरह व्यवहार नहीं कर सकता। मैं गरिमापूर्ण मौन बनाए रखता हूं।’’
 
ईडी और उसके अधिकारी की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, इस दलील का जवाब देते हुए कि उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत याचिका वैध है क्योंकि "कानून का शासन" अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का अभिन्न अंग है।
 
उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री कानून को अपने हाथ में लेती हैं, तो नागरिकों के रूप में जांच अधिकारियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है।
 
मेहता ने कहा, ‘‘डॉ. आंबेडकर ने कभी ऐसी स्थिति की कल्पना भी नहीं की थी। मुख्यमंत्री सैकड़ों पुलिस अधिकारियों के साथ परिसर में घुस गईं। वे दस्तावेज़ ले गए, कंप्यूटर बैकअप रोक दिए और सुरक्षा कैमरों का डेटा छीन लिया। यह कोई अकेली घटना नहीं है; यह एक पैटर्न है।’’
 
उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। यह मेरी कानूनी दलील है। मैं यह साबित करूंगा कि कानून का उल्लंघन कैसे हो रहा है। यह मामला कोयले की अवैध तस्करी का है, जिसकी कुल राशि 2,700 करोड़ रुपये है। ईडी और उनके अधिकारी, जो भारत के नागरिक हैं और अपने वैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं, अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा का अनुरोध कर रहे हैं।’’
 
विधि अधिकारी ने पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से जुड़ी 2019 की घटना का हवाला देते हुए तर्क दिया कि पश्चिम बंगाल में जांच को रोकने के लिए संघीय अधिकारियों को ‘‘गिरफ्तार’’ करने का इतिहास रहा है।