मुंबई
महाराष्ट्र में कुछ नगर निकायों में भाजपा ने चुनाव के बाद कांग्रेस और एआईएमआईएम के साथ गठबंधन कर सत्ता में आने की कोशिश की है। हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे पार्टी अनुशासन का उल्लंघन करार देते हुए चेतावनी दी है कि इसमें शामिल नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पिछले महीने संपन्न नगर निकाय चुनाव के बाद, अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा ने कांग्रेस और अजित पवार की राकांपा के साथ गठबंधन कर ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ का गठन किया। इस गठबंधन में भाजपा की सहयोगी शिवसेना को शामिल नहीं किया गया। अंबरनाथ में शिवसेना ने 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत से कुछ पीछे रही। भाजपा (14), कांग्रेस (12) और राकांपा (4) ने मिलकर बहुमत हासिल किया और भाजपा की तेजश्री करंजुले पाटिल को नगर परिषद अध्यक्ष चुना गया।
इसी तरह, अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में भाजपा ने एआईएमआईएम और अन्य दलों के साथ ‘अकोट विकास मंच’ का गठन किया। यहां भाजपा को 11 और एआईएमआईएम को पांच सीटें मिलीं। अन्य छोटे दलों के सहयोग से गठबंधन को बहुमत प्राप्त हुआ और भाजपा की माया धुले महापौर चुनी गईं। कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाड़ी विपक्ष में रही।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस या एआईएमआईएम के साथ किसी भी गठबंधन को पार्टी मंजूरी नहीं देती। उन्होंने कहा कि ऐसे गठबंधन अनुशासन के खिलाफ हैं और जिन नेताओं ने इसमें भाग लिया, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
इस पर शिवसेना (उबाठा) के सांसद संजय राउत ने टिप्पणी की कि अंबरनाथ और अकोट की घटनाएं दिखाती हैं कि भाजपा सत्ता के लिए किसी भी दल के साथ गठबंधन करने में संकोच नहीं करती।
राज्य में फिलहाल भाजपा, राकांपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना का महायुति गठबंधन सत्ता में है, लेकिन नगर निकाय स्तर पर गठबंधनों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।