महाराष्ट्र को नवी मुंबई में फ्लेमिंगो के ठिकानों से संबंधित चिंताएं को दूर करने का निर्देश

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 24-03-2026
Maharashtra directed to address concerns regarding Flamingo habitats in Navi Mumbai
Maharashtra directed to address concerns regarding Flamingo habitats in Navi Mumbai

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
 केंद्र सरकार ने नवी मुंबई में आर्द्रभूमि के ‘‘जहरीले’’ होने से फ्लेमिंगो (राजहंस) के घटते बसेरों को लेकर जलवायु कार्यकर्ताओं की ओर उठाई चिंताओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के लिए महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया है।
 
रविवार को ‘विश्व जल दिवस’ के अवसर पर कार्यकर्ताओं ने नेरुल में स्थित डीपीएस, एनआरआई और टी. एस. चाणक्य झीलों की बिगड़ती हालत पर चिंता जताई। ये झीलें ठाणे खाडी फ्लेमिंगो अभयारण्य की सहायक आर्द्रभूमियां हैं, जिसे रामसर स्थल का दर्जा प्राप्त है और हर साल बड़ी संख्या में फ्लेमिंगो का आश्रय बनती है।
 
उन्होंने इसे ‘वेटलैंड इमरजेंसी’ करार दिया, क्योंकि नवी मुंबई में फ्लेमिंगो के तीन अहम आश्रय जहरीले होते जा रहे हैं। पानी के नमूनों की जांच में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं।
 
सोमवार को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया में महाराष्ट्र राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण से कहा कि वह इस शिकायत को प्राथमिकता के आधार पर हल करे और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट शिकायतकर्ता तथा केंद्र सरकार दोनों को सौंपे।
 
मंत्रालय ने ‘आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017’ का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि बिना शोधन के अपशिष्ट और रसायनयुक्त पानी छोड़ना, ठोस एवं निर्माण मलबा डालना, अतिक्रमण करना तथा आर्द्रभूमि के पारिस्थितिक स्वरूप में किसी भी प्रकार का बदलाव प्रतिबंधित है।
 
नवी मुंबई में फ्लेमिंगो के आगमन का समय नवंबर से मई तक रहता है, जबकि जनवरी से मार्च के बीच यह काफी संख्या में पहुंचती हैं। इसी दौरान पक्षी तथा प्रकृति प्रेमी इन आर्द्रभूमियों पर जुटते हैं, ताकि फ्लेमिंगो की उस अनोखी ‘गुलाबी परेड’ की झलक पा सकें।
 
 
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