आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
सीमित भूमि संसाधनों के कारण अंतिम संस्कार के वैज्ञानिक प्रबंधन की जरूरत को रेखांकित करते हुए मंगलवार को राज्यसभा में भाजपा के अजित माधवराव गोपछड़े ने कहा कि सभी परंपराओं का सम्मान करते हुए इसके लिए एक नीति बनाई जानी चाहिए।
शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए गोपछड़े ने कहा कि हमारे देश में शहरीकरण बहुत तेज गति से हो रहा है और आबादी भी निरंतर बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भूमि एक बहुमूल्य संसाधन बन चुकी है इसलिए अंतिम संस्कार एवं दफन स्थलों का पारदर्शी एवं दीर्घकालिक प्रबंधन समय की मांग है ताकि भविष्य में भूमि उपयोग एवं नगर नियोजन संबंधी अनावश्यक विवादों से बचा जा सके।
गोपछड़े ने सुझाव दिया कि सभी श्मशान स्थलों एवं कब्रिस्तानों की अनिवार्य डिजिटल मैपिंग या जीएस मैपिंग की जाए जिससे इन स्थलों की भूमि का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।
उन्होंने कहा कि भूमि ऑडिट में जहां पुराने रिकॉर्ड एवं वास्तविक स्थिति में अंतर है वहां व्यापक भूमि ऑडिट किया जाए, आंकड़ों में सुधार कर रिकॉर्ड अद्यतन किया जाए और उसे सार्वजनिक भी किया जाए।
गोपछड़े ने कहा कि नवाचार एवं आधुनिक प्रणालियों के माध्यम से जापान और यूरोपीय देशों में ऊर्ध्वाधर कब्रिस्तानों का चलन एक उभरता हुआ समाधान है। इसके अलावा इन देशों ने गैस या विद्युत शवदाह गृहों जैसी आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल प्रणाली अपनाई है।
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब में बिना मकबरे वाले सरल दफन की परंपरा एक मिसाल है और भारत में भी ऐसी पद्धतियां अपनाई जानी चाहिए।