आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
वॉशिंगटन डीसी से आई एक नई वैज्ञानिक उपलब्धि ने स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में उम्मीदों को और मजबूत कर दिया है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसा आधुनिक कम्प्यूटेशनल तरीका विकसित किया है, जो सूर्य की रोशनी को उपयोगी ईंधन में बदलने वाले नए पदार्थों की खोज को तेज कर सकता है।
यह शोध खास तौर पर पॉलीहेप्टाजीन इमाइड्स नाम के पदार्थों पर केंद्रित है, जो कार्बन नाइट्राइड परिवार का हिस्सा हैं। इनकी खासियत यह है कि ये दिखाई देने वाली रोशनी को अवशोषित कर सकते हैं और उसे रासायनिक ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं। इनकी मदद से हाइड्रोजन उत्पादन, कार्बन डाइऑक्साइड को उपयोगी ईंधन में बदलना और हाइड्रोजन पेरॉक्साइड जैसे रसायनों का निर्माण संभव हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने 53 अलग-अलग धातु आयनों के प्रभाव का अध्ययन किया। इससे यह समझने में मदद मिली कि कौन से संयोजन सबसे बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। इस नई पद्धति से वैज्ञानिक अब बिना हर संभावित पदार्थ को प्रयोगशाला में बनाए, पहले ही यह अनुमान लगा सकते हैं कि कौन सा पदार्थ ज्यादा प्रभावी होगा।
पॉलीहेप्टाजीन इमाइड्स की संरचना परतदार होती है, जो कुछ हद तक ग्रेफीन जैसी दिखती है, लेकिन उससे अलग तरीके से काम करती है। इनकी इलेक्ट्रॉनिक संरचना इन्हें सूर्य की रोशनी को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने लायक बनाती है। साथ ही ये सस्ते, सुरक्षित और तापमान के प्रति स्थिर भी होते हैं।
शोध में यह भी पाया गया कि जब इन पदार्थों में सकारात्मक धातु आयन जोड़े जाते हैं, तो उनकी कार्यक्षमता बढ़ जाती है। इससे इलेक्ट्रॉनों का बेहतर विभाजन होता है और ऊर्जा का नुकसान कम होता है।