कश्मीर की पश्मीना प्रदर्शनी में लाल देद की कविताएं आकर्षण का केंद्र

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 16-10-2026
Lal Ded’s poetry, portraits take centre stage at unique Pashmina exhibition in Kashmir
Lal Ded’s poetry, portraits take centre stage at unique Pashmina exhibition in Kashmir

 

श्रीनगर (जम्मू और कश्मीर) 
 
कश्मीर में पश्मीना शॉल की एक प्रदर्शनी लगाई गई है, जिसमें कश्मीरी सूफी कवयित्री लल देद की रचनाएं और उनके चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। यह प्रदर्शनी इस क्षेत्र की समृद्ध साहित्यिक विरासत, आध्यात्मिक परंपराओं और बेहतरीन कारीगरी का एक अनूठा संगम पेश करती है। अपनी तरह की इस पहली प्रदर्शनी में कला और पश्मीना का मेल देखने को मिलता है, जिसमें लल देद की कालजयी कविताएं और उनके चित्र शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर के जाने-माने कलाकार मसूद हुसैन ने 'मकाम' (MAQAAM) - जो पश्मीना बनाने का एक पारंपरिक केंद्र है - के सहयोग से इस प्रदर्शनी का आयोजन किया है। झेलम नदी के किनारे आयोजित इस प्रदर्शनी ने कला और संस्कृति के शौकीनों को अपनी ओर आकर्षित किया है।
 
इस प्रदर्शनी का उद्देश्य नई पीढ़ी को कश्मीर की साहित्यिक और आध्यात्मिक विरासत से परिचित कराना है। साथ ही, यह उन प्रमुख महिला रहस्यवादी कवयितरियों के योगदान को भी उजागर करती है, जिन्होंने जाति और धर्म की सीमाओं से परे प्रेम, सद्भाव और एकता का संदेश फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लल देद, जिन्हें लल-लैशवरी के नाम से भी जाना जाता है, कश्मीर की एक रहस्यवादी कवयित्री थीं, जो हिंदू दर्शन की 'कश्मीर शैव' परंपरा से जुड़ी थीं। उन्हें कश्मीर की सबसे प्रभावशाली आध्यात्मिक कवयितरियों में से एक माना जाता है। उन्हें रहस्यवादी कविता की एक विशेष शैली, जिसे 'वाख' (Vakh) या 'वत्सुन' (Vatsun) कहा जाता है - जिसका अर्थ 'वाणी' या 'शब्द' है - को लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया जाता है।
 
लल-लैशवरी, जिन्हें आमतौर पर लल देद के नाम से जाना जाता है, हिंदू दर्शन की 'कश्मीर शैव' परंपरा से जुड़ी एक कश्मीरी रहस्यवादी थीं। उन्होंने 'वत्सुन' या 'वाख' नामक रहस्यवादी काव्य शैली की रचना की थी, जिसका अर्थ 'वाणी' होता है। सदियों से, लल देद की कविताएं कश्मीर की साझा सांस्कृतिक विरासत का एक अहम हिस्सा रही हैं। ये कविताएं इस क्षेत्र की आध्यात्मिक खोज और आपसी सद्भाव की परंपराओं को दर्शाती हैं। उनकी रचनाएं आज भी कश्मीर घाटी में अलग-अलग धार्मिक और सामाजिक समुदायों के लोगों के दिलों को छूती हैं।
 
प्रसिद्ध कलाकार मसूद हुसैन ने बेहतरीन काम करते हुए महंगी पश्मीना शॉल पर लल देद के चित्र बनाए हैं। इसके साथ ही, उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले कागज पर उनकी रचनाएं लिखकर प्रदर्शनी की दीवारों पर सजाई हैं। जाने-माने कलाकार मसूद हुसैन ने पश्मीना शॉल पर बनाए गए चित्रों और प्रदर्शनी की दीवारों पर उच्च गुणवत्ता वाले कागज पर प्रदर्शित उनकी कविताओं के माध्यम से, इस कवयित्री की विरासत को जीवंत कर दिया है। यह प्रदर्शनी पारंपरिक कश्मीरी पश्मीना की बेहतरीन कारीगरी को लल देद की कविताओं के सदाबहार आकर्षण के साथ जोड़ती है।
 
यहाँ आने वाले लोग लल देद की कविताओं को पढ़ने के साथ-साथ उनके चित्रों को भी देख सकते हैं। यहाँ का माहौल कलात्मक अभिव्यक्ति, आध्यात्मिकता और कश्मीर की सांस्कृतिक परंपराओं का एक अनूठा संगम है। लल देद की कविताएँ, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'वाख' कहा जाता है, महिलाओं के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हैं और आज भी लोगों की सामूहिक स्मृति में एक अहम स्थान रखती हैं। इस प्रदर्शनी में उच्च शिक्षा और चिकित्सा जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाएँ भी शामिल हुई हैं, जो इस सम्मानित कवयित्री की विरासत को फिर से जानने-समझने के लिए यहाँ एकत्रित हुई हैं।