आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
अमेरिका के कम से कम आठ राज्यों ने कृत्रिम मेधा (एआई) क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ओपनएआई के खिलाफ मुकदमा दायर किया है और उनका आरोप है कि कंपनी का लोकप्रिय चैटबॉट बच्चों को नुकसान पहुंचा रहा है और वयस्कों को गुमराह कर रहा है।
अभियोजकों ने आरोप लगाया कि कंपनी मुनाफा कमाने की होड़ में लापरवाही बरत रही है और उसका चैटबॉट राज्य के उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का उल्लंघन कर रहा है।
मुकदमों में कहा गया है कि कंपनी का चैटबॉट मॉडल ‘चैटजीपीटी’ खतरनाक चिकित्सकीय सलाह दे रहा है, लोगों के मन में संदेह और भ्रम को बढ़ावा दे रहा है तथा उन्हें आत्महत्या करने या दूसरों को चोट पहुंचाने अथवा उनकी हत्या करने के लिए उकसा रहा है।
मुकदमों में यह भी आरोप लगाया गया है कि चैटबॉट खुद को संवेदनशील दिखाते हैं, लेकिन वास्तव में वे कमजोर परिस्थितियों में रहने वाले लोगों और किशोरों का फायदा उठा रहे हैं। किशोर वह पहली पीढ़ी हैं जो कृत्रिम मेधा के साथ बड़ी हो रही है।
आयोवा की अटॉर्नी जनरल ब्रेना बर्ड ने एक बयान में कहा, ‘‘ओपनएआई बच्चों को नुकसान पहुंचा रहा है और वह आयोवा के लोगों से झूठ बोल रहा है।’’