केरल: 'चुनिंदा' नायर घरों में प्रचार पर पूर्व माकपा नेता ने पार्टी को घेरा

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 06-04-2026
Kerala: Former CPI(M) Leader Slams Party Over Campaigning in 'Select' Nair Households
Kerala: Former CPI(M) Leader Slams Party Over Campaigning in 'Select' Nair Households

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पूर्व नेता जी सुधाकरन और पार्टी के बीच जुबानी जंग सोमवार को और तेज हो गई, जब उन्होंने वामपंथी नेता सी एस सुजाता पर अंबलपुझा निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान “चुनिंदा रूप से” नायर समुदाय के घरों में जाने का आरोप लगाया।
 
कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे सुधाकरन नौ अप्रैल को होने वाले चुनाव में माकपा के मौजूदा विधायक एच सलाम के खिलाफ मैदान में हैं।
 
सुजाता अलाप्पुझा जिले में माकपा की वरिष्ठ नेता हैं और अंबलपुझा में पार्टी के चुनाव प्रचार में सक्रिय रूप से शामिल हैं।
 
पुन्नाप्रा में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए सुधाकरन ने दावा किया कि सलाम चुनाव नहीं जीतेंगे।
 
उन्होंने आरोप लगाया कि सुजाता का राजनीतिक भविष्य उज्ज्वल था, लेकिन कायमकुलम में रहने के बजाय अंबलपुझा में पार्टी के लिए काम करके उन्होंने इसे बर्बाद कर दिया।
 
उन्होंने कहा, “वह केवल नायर समुदाय के लोगों के घरों में जाती हैं, बालों में फूल और तुलसी के पत्ते लगाकर, ताकि वह उन्हीं में से एक लगें। उन्हें नायरों के वोट नहीं मिलेंगे।”
 
सुधाकरन ने आरोप लगाया कि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) उम्मीदवार निर्वाचन क्षेत्र में नायर और दीवरा समुदायों के बीच फूट डालने का प्रयास कर रहा है।
 
उन्होंने अपने भाई भुवनेश्वरण की मृत्यु के संबंध में भी आरोप लगाए।
 
एनएसएस पंडालम कॉलेज में एसएफआई इकाई के सचिव भुवनेश्वरण की दिसंबर 1977 में कथित तौर पर केएसयू के हमले में हत्या कर दी गई थी।
 
सुधाकरन ने आरोप लगाया कि घटना वाले दिन उनके भाई को कॉलेज भेजने के लिए माकपा कार्यकर्ता जिम्मेदार थे और एसएफआई कार्यकर्ताओं ने ही हमले के लिये जिम्मेदार स्थिति पैदा की थी।
 
इन आरोपों का जवाब देते हुए सुजाता और माकपा के जिला सचिव आर. नजर ने इन दावों को खारिज कर दिया और सुधाकरन पर चुनावी लाभ के लिए निराधार बयान देने का आरोप लगाया।
 
नजर ने कहा कि सुधाकरन ने पहले भ्रष्टाचार को लेकर यूडीएफ सरकार की आलोचना की थी, लेकिन अब वे खुद उसी मोर्चे के साथ जुड़ गए हैं।
 
नजर ने आरोप लगाया, “उन्होंने माकपा का टिकट पाने की कोशिश की, लेकिन कई बार चुनाव लड़ने के कारण उन्हें टिकट नहीं मिला। अब यूडीएफ में शामिल होकर वे झूठा प्रचार कर रहे हैं।”
 
उन्होंने भुवनेश्वरण की हत्या पर सुधाकरन के रुख में बदलाव का भी आरोप लगाया।