अमित जोगी ने कार्यवाही में जानबूझकर देरी करने का प्रयास किया: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 06-04-2026
Amit Jogi attempted to deliberately delay the proceedings: Chhattisgarh High Court
Amit Jogi attempted to deliberately delay the proceedings: Chhattisgarh High Court

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को कड़ी फटकार लगाते हुए उन पर बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्या मामले की कार्यवाही को रोकने के लिए ‘‘जानबूझकर देरी करने की रणनीति’’ अपनाने का आरोप लगाया है।
 
उच्च न्यायालय ने अमित जोगी को 2003 में जग्गी की हत्या की साजिश रचने का दोषी ठहराया। उसके 75 पृष्ठ के फैसले से पता चलता है कि आरोपी ने न्याय में विलंब करने के लिए किस तरह कानूनी व्यवस्था को चरम सीमा तक धकेलने का प्रयास किया।
 
अदालत द्वारा दो अप्रैल को पारित आदेश की प्रति सोमवार को उपलब्ध कराई गई।
 
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने फैसले में कहा कि वकीलों को बार-बार बदलना और स्थगन के लिए ‘‘यंत्रवत’’ अनुरोध करना उस मामले को आगे बढ़ाने में बाधा डालने की स्पष्ट कोशिश थी जिसे उच्चतम न्यायालय ने शीघ्र निस्तारण के लिए वापस भेजा था।
 
पीठ ने चिंता जताते हुए कहा कि पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद अमित जोगी की ओर से पेश वकीलों की टीम ने एक ही आधार पर चार सप्ताह के स्थगन की बार-बार मांग की।
 
अधिवक्ता शैलेंद्र शुक्ल को 25 मार्च, 2026 को मामले का पूरा रिकॉर्ड (पेपर बुक) उपलब्ध करा दिया गया था, लेकिन बाद में उन्होंने यह कहते हुए खुद को अलग कर लिया कि उनके मुवक्किल ने उन्हें उसका वकालतनामा दाखिल करने से ‘‘रोक दिया’’ था।
 
इसके बाद नये अधिवक्ता विकास वालिया एक अप्रैल एवं फिर दो अप्रैल को पेश हुए और ‘‘विस्तृत’’ रिकॉर्ड का अध्ययन करने के लिए और समय मांगा।
 
अदालत ने कहा, ‘‘...जब आरोपी अमित जोगी की ओर से पेश अधिवक्ता को दलीलें शुरू करने के लिए कहा गया तो वालिया ने अपनी दलीलें शुरू करने का जरा सा भी प्रयास भी नहीं किया और केवल इतना ही कहा कि उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय चाहिए।’’