Kerala: Controversy erupts over question on Savarkar in school quiz; minister seeks report
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केरल के एक स्कूल में प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम के दौरान हिंदुत्व विचारक वी डी सावरकर की कथित तौर पर प्रशंसा करने वाले सवाल को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। वामपंथी छात्र संगठनों ने कांग्रेस नीत यूडीएफ (संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा) सरकार पर ‘‘संघ परिवार के एजेंडे के साथ खड़े होने’’ का आरोप लगाया है।
मामले पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आने के बाद राज्य के सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने शनिवार को सामान्य शिक्षा निदेशक से रिपोर्ट मांगी है। यह प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम उत्तरी कासरगोड जिले के कुंबला और मंजेश्वरम उप-जिलों के विद्यालयों में आयोजित किया गया था।
शिक्षा विभाग की ओर से प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों के लिए आयोजित ‘फ्रीडम क्विज’ में पूछा गया था, ‘‘वह स्वतंत्रता सेनानी कौन हैं जिन्हें अंग्रेजों ने सबसे कठोर सजा दी थी?’’ इसका उत्तर वी. डी. सावरकर दिया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार यह प्रश्नावली ‘सोशल साइंस क्लब एसोसिएशन’ के प्रभारी शिक्षकों ने तैयार की थी।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब वामपंथी छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि हिंदुत्व विचारक और महात्मा गांधी की हत्या की साजिश के आरोपी सावरकर को सवाल में एक स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर दिखाया गया है।
विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की छात्र इकाई ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एसएफआई) ने आरोप लगाया कि यूडीएफ सरकार और उसकी प्रमुख सहयोगी ‘इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग’ (आईयूएमएल) देश के स्वतंत्रता संग्राम में संघ परिवार को जगह देने की कोशिश कर रहे हैं।
एसएफआई के राज्य सचिव पी. एस. संजीव ने फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘‘केरल में यूडीएफ सरकार के तहत सामान्य शिक्षा विभाग आईयूएमएल के पास है। इस सरकार में उस संघ परिवार को स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका देने की कोशिश की जा रही है, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन के साथ विश्वासघात किया था।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि कासरगोड जिले में छात्रों के लिए आयोजित प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में ‘‘गांधी की हत्या के मुख्य साजिशकर्ता’’ को स्वतंत्रता सेनानी के रूप में प्रस्तुत किया गया।
संजीव ने यह भी आरोप लगाया,‘‘ प्रधानमंत्री श्री योजना (पीएम श्री) के मुद्दे पर आईयूएमएल का संघ परिवार विरोधी रुख महज दिखावा साबित हुआ है। लीग न तो संघ परिवार के खिलाफ है और न ही उसका कोई स्पष्ट रुख है। उसके पास केवल कारोबारी हित और सत्ता की लालसा है।’’