Journalists summoned in Kashmir: Editors' Association, political parties express outrage
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मस्जिदों और उनकी प्रबंधन समितियों के संबंध में जानकारी जुटाने से संबंधित खबरों के लिए मुख्यधारा के अंग्रेजी दैनिकों के कम से कम दो पत्रकारों को तलब किया। इस कदम से एक बड़ी बहस छिड़ गई जिसमें एडिटर्स गिल्ड और कई राजनीतिक दलों ने अपना रोष व्यक्त किया।
इंडियन एक्सप्रेस और हिंदुस्तान टाइम्स ने बुधवार को अपने संवाददाताओं को पिछले सप्ताह पुलिस के साइबर प्रकोष्ठ द्वारा तलब किए जाने की खबरें प्रकाशित कीं।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इसके सहायक संपादक बशारत मसूद, जिन्होंने दो दशकों से इस क्षेत्र में पत्रकारिता की है, ने श्रीनगर के साइबर पुलिस थाने में चार दिनों में 15 घंटे बिताए और उनसे एक बॉण्ड पर हस्ताक्षर करने को कहा गया कि वह शांति भंग करने वाला कोई काम नहीं करेंगे। उन्होंने ऐसा नहीं किया।
अखबार ने बताया कि मसूद को पहला फोन 14 जनवरी को आया था जिसमें उन्हें अगले दिन साइबर पुलिस थाने में उपस्थित होने के लिए कहा गया था। वह 15 से 19 जनवरी के बीच थाने गए।
इंडियन एक्सप्रेस के मुख्य संपादक राज कमल झा के हवाले से कहा गया है, “पिछले दो दशकों में उनका काम खुद ही अपनी कहानी बयां करता है।”
हिंदुस्तान टाइम्स ने अपनी खबर में कहा कि उसके संवाददाता आशिक हुसैन को भी मौखिक समन मिला था, लेकिन अखबार ने जवाब देने के लिए “कारण सहित” लिखित समन की मांग की।
ऐसी अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि कुछ अन्य पत्रकारों को भी साइबर पुलिस थाने बुलाया गया था, लेकिन इसकी तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की।
इन खबरों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ईजीआई) ने एक बयान में कहा कि उसने “कश्मीर में अधिकारियों द्वारा वैध पत्रकारिता गतिविधियों के निरंतर दमन” पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
कई राजनीतिक दलों ने भी इस पर अपनी राय रखी।