मध्य पूर्व संकट पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद की चिंता: मौलाना महमूद मदनी ने तत्काल युद्धविराम की मांग की

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 03-03-2026
Jamiat Ulema-e-Hind expresses concern over the Middle East crisis: Maulana Mahmood Madani calls for an immediate ceasefire
Jamiat Ulema-e-Hind expresses concern over the Middle East crisis: Maulana Mahmood Madani calls for an immediate ceasefire

 

नई दिल्ली

मध्य पूर्व में तेजी से बिगड़ते हालात पर Jamiat Ulama-i-Hind के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती सैन्य कार्रवाई वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। उनके अनुसार अमेरिका और इज़रायल की हालिया आक्रामक कार्रवाइयों ने क्षेत्र में तनाव को खतरनाक स्तर तक पहुंचा दिया है और हालात एक संवेदनशील मोड़ पर खड़े हैं।

मौलाना मदनी ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, उनके सहयोगियों और परिवार के सदस्यों की हत्या पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी संप्रभु देश के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानदंडों और संधियों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाइयां दुनिया को और अधिक अस्थिरता की ओर धकेल सकती हैं। इस दुख की घड़ी में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ईरान की जनता के साथ एकजुटता प्रकट करती है।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र के अन्य देशों में ईरान की गतिविधियों को लेकर भी चिंता है। उनका कहना था कि मौजूदा परिस्थितियां संयम, संवाद और सामूहिक शांति प्रयासों की मांग करती हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बल प्रयोग या रक्तपात से नहीं हो सकता। सैन्य कार्रवाई केवल दुश्मनी को गहरा करती है, प्रतिशोध की श्रृंखला को जन्म देती है और अंततः मानवीय संकट को बढ़ाती है।

मौलाना मदनी ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे तत्काल प्रभाव से युद्धविराम सुनिश्चित कराने, तनाव कम करने और सार्थक कूटनीतिक वार्ता शुरू कराने में सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि यदि वैश्विक शक्तियां जिम्मेदारी, निष्पक्षता और कूटनीतिक विवेक के साथ आगे नहीं बढ़ीं, तो इस संकट का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्थिरता को भी गंभीर खतरा उत्पन्न करेगा।

अपने संगठन की स्थिति दोहराते हुए उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद हर उस कार्रवाई का विरोध करती है जो मानवता को युद्ध और अस्थिरता की ओर धकेलती है। उन्होंने सभी पक्षों से तत्काल संवाद और शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से समाधान खोजने की अपील की, ताकि क्षेत्र में और अधिक विनाश और जनहानि रोकी जा सके।