बिदर (कर्नाटक)।
ईरान–इज़रायल संघर्ष के बीच दुबई सहित पश्चिम एशिया के विभिन्न ट्रांजिट हब पर फंसे कर्नाटक के नागरिकों को लेकर राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाई है। कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा है कि फंसे हुए कन्नडिगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रयास जारी हैं और यह प्रक्रिया अभी “वर्क इन प्रोग्रेस” है।
प्रियांक खड़गे ने बताया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कर्नाटक सहित सभी भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि चूंकि यह एक अंतरराष्ट्रीय मसला है और कई देशों ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है, इसलिए स्थिति जटिल है, लेकिन केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय लगातार संपर्क में हैं। जो लोग राज्य सरकार या कॉल सेंटरों के माध्यम से संपर्क कर रहे हैं, उन्हें दूतावास से सीधे संपर्क के लिए आवश्यक नंबर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा पोस्ट में कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री से मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से प्रभावित कन्नडिगों और अन्य भारतीयों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कूटनीतिक प्रयासों को मजबूत करने, आवश्यकता पड़ने पर विशेष प्रत्यावर्तन उड़ानों की तैयारी रखने और भारतीय दूतावासों तथा एयरलाइंस के साथ समन्वित सहायता सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा कि कर्नाटक सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है।
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने पश्चिम एशिया के कई देशों द्वारा जारी एयरस्पेस प्रतिबंधों और नोटिस टू एयरमेन (NOTAM) का उल्लेख किया है, जिनके कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ान संचालन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। इन प्रतिबंधों के चलते बड़ी संख्या में कन्नडिग और अन्य भारतीय नागरिक दुबई जैसे प्रमुख ट्रांजिट केंद्रों पर फंसे हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि बदलते सुरक्षा हालात, सैन्य गतिविधियों और नागरिक हवाई क्षेत्र बंद होने से प्रभावित लोगों और उनके परिवारों में भारी चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव कार्यालय ने पहले ही विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय शुरू कर दिया है ताकि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और संभावित प्रत्यावर्तन उपायों पर काम किया जा सके।
साथ ही नागरिक उड्डयन मंत्रालय से अनुरोध किया गया है कि वह एयरलाइंस के साथ मिलकर लचीले री-शेड्यूलिंग विकल्प, पेनल्टी में छूट और फंसे यात्रियों के लिए अंतरिम सहायता जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करे।
दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिसके चलते पश्चिम एशिया के कई देशों ने एहतियातन अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। परिणामस्वरूप अनेक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द या डायवर्ट करनी पड़ीं, जिससे हजारों यात्री विभिन्न एयरपोर्ट्स पर फंस गए।
कर्नाटक सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जैसे-जैसे हालात स्पष्ट होंगे, आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल प्राथमिकता फंसे हुए नागरिकों की सुरक्षा और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना है।