भारतीय नाविकों की मौत पर जमाअत ने उठाए कड़े सवाल

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 13-06-2026
Jamaat raises serious questions over the deaths of Indian sailors.
Jamaat raises serious questions over the deaths of Indian sailors.

 

नई दिल्ली:

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने ओमान तट के निकट कमर्शियल टैंकर ‘सेटेबेलो’ पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने इस घटना को बेहद गंभीर और अस्वीकार्य बताते हुए निष्पक्ष जांच, दोषियों की जवाबदेही और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है।

जारी बयान में सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार हाल के दिनों में यह तीसरा ऐसा जहाज़ है, जिसमें भारतीय चालक दल मौजूद था और जो अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का शिकार बना। उन्होंने कहा कि लगातार ऐसी घटनाओं का सामने आना अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है।

उन्होंने तीनों भारतीय नाविकों की मौत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उनके परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने कहा कि यह केवल तीन परिवारों की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि उन हजारों भारतीय समुद्री कर्मियों की सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न भी है, जो दुनिया के विभिन्न समुद्री मार्गों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने दिवंगत नाविकों के परिजनों के लिए धैर्य और इस कठिन समय से उबरने की प्रार्थना की।

जमाअत के अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी आम नागरिक या व्यावसायिक जहाज़ को सैन्य कार्रवाई का निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि निर्दोष नागरिकों की मौत को केवल "कोलेटरल डैमेज" कहकर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। व्यावसायिक समुद्री मार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की जीवनरेखा हैं, इसलिए वहां कार्यरत नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है।

सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा, "अमेरिकी सेना के लापरवाह हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत बेहद दुखद और अस्वीकार्य है। कोई भी सैन्य या राजनीतिक उद्देश्य निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई को उचित नहीं ठहरा सकता। हम इस घटना की कड़ी निंदा करते हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत निष्पक्ष जांच तथा पीड़ितों के लिए न्याय की मांग करते हैं।"

उन्होंने भारत सरकार से इस मामले में मजबूत और स्पष्ट कूटनीतिक रुख अपनाने की अपील की। उनका कहना था कि भारतीय नागरिकों की मौत पर सरकार को संबंधित पक्ष के समक्ष कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने यह भी मांग की कि मृतक नाविकों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही उनके आश्रितों के लिए तत्काल आर्थिक सहायता, रोजगार संबंधी सहयोग तथा आवश्यक राहत और पुनर्वास की व्यापक व्यवस्था की जाए ताकि प्रभावित परिवारों को लंबे समय तक सहारा मिल सके।

क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल की सैन्य आक्रामकता अंतरराष्ट्रीय कानून और देशों के बीच स्वीकार्य आचरण के सिद्धांतों के विरुद्ध है। उनके अनुसार यदि इस प्रकार की सैन्य गतिविधियां जारी रहती हैं तो पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है, आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग भी प्रभावित हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों में असुरक्षा केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय शांति पर भी पड़ता है। इसलिए इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

अंत में जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और भारत सरकार से अपील की कि वे क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए प्रभावी पहल करें, निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और अंतरराष्ट्रीय कानून तथा मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं।