रेस कोर्स मस्जिद को बेदखली नोटिस पर जमाअत चिंतित, सुरक्षा की मांग

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 22-10-2026
Jamaat concerned over eviction notice for Race Course mosque; demands security
Jamaat concerned over eviction notice for Race Course mosque; demands security

 

नई दिल्ली

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद को बेदखली नोटिस दिए जाने और उसके ध्वस्तीकरण की आशंका पर गहरी चिंता जताई है। जमाअत के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने संबंधित अधिकारियों से मस्जिद और उससे लगे कब्रिस्तान की सुरक्षा सुनिश्चित करने, बिजली-पानी जैसी जरूरी सुविधाएं बहाल करने तथा नमाजियों के लिए मस्जिद तक निर्बाध पहुंच का रास्ता उपलब्ध कराने की अपील की है।

21 अक्टूबर 2026 को मीडिया को जारी बयान में मलिक मोतसिम खान ने कहा कि रेस कोर्स मस्जिद पीढ़ियों से नमाजियों की इबादतगाह रही है और 1977 से राजपत्रित वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज है। ऐसे में मस्जिद को बेदखली और ध्वस्तीकरण की धमकी मिलना बेहद चिंताजनक है।

उन्होंने कहा, “हम अधिकारियों से आग्रह करते हैं कि मस्जिद की दस्तावेजी स्थिति और संबंधित अभिलेखों पर विधिवत विचार किया जाए। ऐतिहासिक मस्जिद और उसके आसपास के कब्रिस्तान को पूरी सुरक्षा प्रदान की जाए।”

बिजली-पानी बहाल करने और रास्ता खोलने की मांग

जमाअत के उपाध्यक्ष ने मस्जिद की बिजली काटे जाने और इमाम पर परिसर खाली करने के लिए कथित तौर पर अनुचित दबाव बनाए जाने पर भी चिंता जताई। उन्होंने मांग की कि बिजली और पानी की आपूर्ति तत्काल बहाल की जाए तथा नमाजियों को मस्जिद आने-जाने के लिए बिना किसी बाधा के रास्ता दिया जाए।

उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई न्याय और निष्पक्षता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। प्रशासन को अपनी कार्रवाई का कानूनी आधार स्पष्ट करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नमाजियों के अधिकारों तथा सम्मान की रक्षा हो।

मलिक मोतसिम खान के मुताबिक, किसी ऐतिहासिक धार्मिक स्थल से जुड़े मामले में संबंधित दस्तावेजों, संपत्ति की स्थिति और लागू कानूनी प्रावधानों पर निष्पक्ष विचार किया जाना जरूरी है।

वक्फ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि संबंधित वक्फ अधिकारियों ने बेदखली की कार्रवाई को प्रभावी ढंग से चुनौती नहीं दी। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले संस्थानों को अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब किसी वक्फ संपत्ति पर खतरा उत्पन्न हो, तो संबंधित अधिकारियों को समय रहते उचित कानूनी कदम उठाने चाहिए। कानून का पालन और ऐतिहासिक धरोहरों की रक्षा प्रशासनिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है। समुदायों को अपनी इबादतगाहों की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता में नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि रेस कोर्स मस्जिद का मामला उन धार्मिक स्थलों से जुड़ी चिंताओं को और बढ़ाता है, जिन्हें बेदखली या ध्वस्तीकरण की आशंकाओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे घटनाक्रम समुदाय में नाराजगी पैदा करते हैं और संबंधित फैसलों के उद्देश्यों पर सवाल खड़े करते हैं।

मलिक मोतसिम खान ने अधिकारियों से अन्यायपूर्ण और भेदभावपूर्ण फैसलों से बचने की अपील करते हुए कहा कि प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल सांप्रदायिक राजनीति को बढ़ावा देने या धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए नहीं होना चाहिए।

केंद्र और दिल्ली सरकार से हस्तक्षेप की अपील

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और संबंधित प्रशासनिक निकायों से मांग की है कि मस्जिद और उससे लगे कब्रिस्तान की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, आवश्यक सेवाएं बहाल हों और नमाजियों की आवाजाही में कोई बाधा न रहे। संगठन ने बेदखली और तोड़फोड़ से संबंधित कार्रवाइयों को रोकने की भी अपील की है।

जमाअत का कहना है कि पूरे मामले का समाधान कानूनी और पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए तथा मस्जिद की दस्तावेजी स्थिति और संबंधित रिकॉर्ड को उचित महत्व दिया जाना चाहिए।

संगठन ने जोर दिया कि ऐतिहासिक इबादतगाहों की सुरक्षा और कानून के समक्ष समान व्यवहार सुनिश्चित करना जनविश्वास, न्याय तथा सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए जरूरी है।