नई दिल्ली।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) प्रशासन ने विश्वविद्यालय में जारी छात्र आंदोलन का समाधान बातचीत, आपसी विश्वास और रचनात्मक संवाद के जरिए निकालने की प्रतिबद्धता दोहराई है। छात्र प्रतिनिधित्व और छात्रसंघ के गठन से जुड़े मुद्दों पर जारी गतिरोध के बीच विश्वविद्यालय ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्रसंघ (जेएमआईएसयू) का संविधान तैयार करने के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की है।
विश्वविद्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, 18 अक्टूबर 2026 को वरिष्ठ डीन और प्रोफेसरों की सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की गई थी। समिति को आंदोलनरत छात्रों से बातचीत करने और उनकी मांगों की समीक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद समिति ने छात्रों के प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दे पर समाधान तलाशने के लिए कई स्तरों पर चर्चा की।
प्रशासन के मुताबिक, उच्चस्तरीय समिति ने 19 अक्टूबर की सुबह ही प्रदर्शनकारी छात्रों से संपर्क किया और बातचीत शुरू करने के लिए धरनास्थल का दौरा किया। विश्वविद्यालय ने शुरुआती बातचीत को सकारात्मक और उपयोगी बताया है।
इसके बाद समिति ने छात्रों से विश्वविद्यालय के वास्तविक विद्यार्थियों की सूची मांगी और प्रतिनिधिमंडल को सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन कार्यालय में चर्चा के लिए आमंत्रित किया।
इस निमंत्रण पर छात्र प्रतिनिधियों ने 20 अक्टूबर को सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन कार्यालय में आयोजित करीब दो घंटे की बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान छात्रों की शिकायतों और मांगों को सुना गया तथा उन पर चर्चा की गई।
इसी दिन शाम 6:30 बजे छात्र कल्याण अधिष्ठाता (डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर यानी डीएसडब्ल्यू) के कार्यालय में एक और बैठक हुई। इसका उद्देश्य बातचीत के कार्यवृत्त यानी मिनट्स को अंतिम रूप देना था, जिसमें छात्रों की ओर से रखे गए व्यापक सुझावों को शामिल किया जाना था।
प्रशासन के अनुसार, कई दौर की चर्चा और दस्तावेज को अंतिम रूप देने की कोशिशों के बावजूद छात्र प्रतिनिधि कार्यवृत्त पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत नहीं हुए।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि कार्यवृत्त पर सहमति नहीं बनने के बावजूद समिति और प्रशासन समाधान की दिशा में प्रयास करते रहे।
इसी क्रम में 21 अक्टूबर को कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई। इसमें रजिस्ट्रार प्रोफेसर मोहम्मद महताब आलम रिजवी भी मौजूद रहे।
बैठक में 18 अक्टूबर को गठित उच्चस्तरीय समिति के सभी सदस्यों के अलावा विश्वविद्यालय के सभी संकायों के डीन, डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर, परीक्षा नियंत्रक, डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स, चीफ प्रॉक्टर, सभी प्रोवोस्ट, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी और सुरक्षा सलाहकार शामिल हुए।
बैठक में उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों और छात्रों के साथ हुई बातचीत पर विचार किया गया। साथ ही परिसर में शांति और सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां बहाल करने के लिए आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।
जामिया प्रशासन ने बताया कि विश्वविद्यालय अधिनियम, 1988 की धारा 23 (जे) और (के) के प्रावधानों के तहत छात्रसंघ का संविधान तैयार करने के लिए एक समिति गठित कर उसे अधिसूचित किया गया है।
समिति वर्ष 2006 में जामिया छात्रसंघ के विघटन की परिस्थितियों, छात्रसंघ से संबंधित सक्षम न्यायालयों के विभिन्न आदेशों और वर्ष 2007 की लिंगदोह समिति की सिफारिशों पर विचार करेगी।
विश्वविद्यालय के अनुसार, जामिया में आखिरी छात्रसंघ वर्ष 2006 में भंग किया गया था। इसके बाद लगभग दो दशकों में कानूनी और संस्थागत परिस्थितियों में कई बदलाव हुए हैं। ऐसे में छात्रसंघ के मुद्दे की मौजूदा कानूनी व्यवस्था के संदर्भ में व्यापक समीक्षा जरूरी है।
समिति छात्रसंघ चुनावों से संबंधित मौजूदा न्यायालयी आदेशों, विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र संगठनों तथा छात्रसंघ चुनावों को लेकर लिंगदोह समिति की सिफारिशों और जामिया के लागू अध्यादेशों एवं नियमों की भी समीक्षा करेगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि वह छात्रों के अधिकारों की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने और परिसर में शांति एवं सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही जामिया के शैक्षणिक वातावरण, विरासत तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा की रक्षा को भी प्राथमिकता दी जाएगी।