Jadavpur University: Committee that approved the program of Left student groups in the presence of Neha Bora dissolved
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
यादवपुर विश्वविद्यालय ने परिसर में वाम समर्थित छात्र संगठनों द्वारा आयोजित एक सम्मेलन और उसमें आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा की मौजूदगी को लेकर हुए विवाद के बाद कार्यक्रमों को मंजूरी देने वाली एक समिति को भंग कर दिया है और कुलसचिव को ऐसे मामलों की जिम्मेदारी संभालने का निर्देश दिया है।
सोमवार को आयोजित ‘जेन जी मूवमेंट: यूनिटी ऑफ जेनरेशन एंड रेजिस्टेंस’ नामक सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाएं आयोजित कराने वाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को खत्म करने समेत विभिन्न मांगों पर चर्चा की गई। इसके अलावा, इसमें मतदाता सूचियों के विशेष गहन परीक्षण (एसआईआर) और प्रस्तावित भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) विधेयक का भी विरोध किया गया।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने विश्वविद्यालय के बाहर की राजनीतिक हस्तियों की कथित मौजूदगी का विरोध किया और सवाल उठाया कि क्या कार्यक्रम को प्रशासनिक अनुमति मिली थी। आयोजकों ने पलटकर कहा कि आरएसएस से संबद्ध छात्र संगठन को “बाहरी लोगों” के बारे में बात करने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि अगस्त में अशांति के दौरान उसके कई नेता, जिनका विश्वविद्यालय से कोई संबंध नहीं था, जबरन परिसर में घुस आए थे।
विवाद के बाद, विश्वविद्यालय के कुलपति चिरंजीब भट्टाचार्य ने मंगलवार को एक अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि ‘कार्यक्रमों के अनुमोदन और निगरानी’ समिति को भंग कर दिया गया है और कुलसचिव देबजीत दत्ता अगले आदेश तक मामलों की देखरेख करेंगे।
अधिसूचना में हालांकि निर्णय का कारण निर्दिष्ट नहीं किया गया था, दत्ता ने बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि कार्यक्रम को अनुमति देने में “प्रक्रियात्मक चूक” के कारण समिति को भंग कर दिया गया और जल्द ही एक नयी समिति गठित की जाएगी।
कुलसचिव ने कहा, “हमने कार्यक्रमों के अनुमोदन और निगरानी समिति के अध्यक्ष और डीन को भी ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है तथा इस चूक के लिए स्पष्टीकरण मांगा है।”