Bangladeshi wife of Indian citizen was rightly prevented from entering India: Calcutta High Court
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि भारतीय नागरिक की बांग्लादेशी पत्नी को फर्जी तरीके से दस्तावेज हासिल करने के कारण भारत में प्रवेश से रोकने का आव्रजन अधिकारियों का फैसला सही था।
याचिकाकर्ता भारतीय नागरिक ने पांच सितंबर को एक प्रतिवेदन देकर अपनी बांग्लादेशी पत्नी और नाबालिग बेटे को भारत में प्रवेश की अनुमति देने का अनुरोध किया था।
न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने कहा कि याचिकाकर्ता की पत्नी को भारत में प्रवेश देने से आव्रजन अधिकारियों का ‘इनकार’ करना उचित था। इसके साथ ही अदालत ने बांग्लादेशी पत्नी को भारत में अपने पति के साथ रहने के लिए प्रवेश देने के निर्देश संबंधी याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने कहा कि शादी के बाद महिला भारतीय नागरिक की पत्नी के तौर पर ‘मल्टीपल-एंट्री एक्स-आई’ वीजा के जरिये भारत आती-जाती थी। उसे आखिरी बार 25 सितंबर 2025 को वीजा जारी किया गया था, जो 24 सितंबर 2026 तक वैध था।
महिला अप्रैल 2026 में बांग्लादेश गई थी और भारत लौटते समय 23 अगस्त को आव्रजन संबंधी कारणों से उसे प्रवेश देने से इनकार कर दिया गया।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि महिला कभी भारत और कभी बांग्लादेश में रहती है।
उन्होंने दलील दी कि आव्रजन अधिकारियों ने महिला को भारत में प्रवेश देने से बिना कोई कारण बताए इनकार कर दिया।
आव्रजन अधिकारियों के समक्ष महिला को भारत में प्रवेश देने का अनुरोध करने वाले प्रतिवेदन पर विचार नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए यह याचिका दायर की गई थी।
विदेशी नागरिक पंजीकरण कार्यालय (एफआरओ) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि याचिकाकर्ता प्रदीप बोस की पत्नी श्राबंती चौधरी बांग्लादेश की नागरिक हैं और उनका पासपोर्ट सात सितंबर 2027 तक वैध है।