श्रीनगर (जम्मू और कश्मीर)
परिवार और दोस्तों के लिए खाना बनाने से लेकर अपना खुद का क्लाउड किचन चलाने तक, सैयद उरनाइब श्रीनगर में खाना पकाने के अपने शौक को एक बिजनेस के रूप में बदल रही हैं। उनका लक्ष्य अपने बिजनेस को बढ़ाना, महिलाओं को सशक्त बनाना और रोजगार के अवसर पैदा करना है। कश्मीर यूनिवर्सिटी से M.Com ग्रेजुएट, उरनाइब ने सऊदी अरब में कई साल बिताए, जहाँ उन्होंने एक स्कूल में भी काम किया। कश्मीर वापस लौटने के बाद, उन्होंने घर का बना खाना तैयार करने और परोसने के अपने पुराने शौक को आगे बढ़ाना शुरू किया। उन्हें अपने परिवार और दोस्तों से काफी तारीफ मिली, जिससे उन्हें और प्रोत्साहन मिला।
उरनाइब ने ANI को बताया, "खाना पकाना मेरा शौक था। मुझे खाना बनाना, लोगों को खाना परोसना और तरह-तरह के व्यंजन तैयार करना बहुत पसंद था। मैं सही समय पर खुद को पहचान नहीं पाई थी, लेकिन अच्छी बात यह है कि शादी के 12 साल बाद मुझे जीवन में कुछ करने का मौका मिला।" शुरुआत में उन्हें अपने जान-पहचान वालों से छोटे-छोटे ऑर्डर मिलते थे, जो धीरे-धीरे लोगों की सिफारिशों (word-of-mouth) के जरिए बढ़ते गए। एक दोस्त ने उन्हें लगभग 150 लोगों की पार्टी के लिए कैटरिंग का काम सौंपा, जो उनके सफर में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ।
जैसे-जैसे मांग बढ़ी, उनके घर की रसोई में इतने सारे ऑर्डर संभालना मुश्किल हो गया। इसलिए, उन्होंने 'उरनाइब्स ईटरी' (Urnaib's Eatery) के नाम से एक अलग क्लाउड किचन शुरू करने का फैसला किया। शुरुआत में उरनाइब ने अपनी जेब से लगभग 50,000 रुपये लगाए और बाद में अपनी कमाई को भी वापस बिजनेस में ही लगा दिया। उन्होंने बिजनेस को बढ़ाने के लिए पार्ट-टाइम और फुल-टाइम काम भी किया और अपने इस काम को विकसित करने के लिए लोन भी लिया। उन्होंने कहा, "मैंने जो कुछ भी कमाया, उसे वापस अपने बिजनेस में लगा दिया। मेरा सपना था कि मेरा अपना एक ब्रांड और क्लाउड किचन हो।"
'उरनाइब्स ईटरी' में ग्राहकों की पसंद के हिसाब से खाना तैयार किया जाता है, जिसमें चिकन बिरयानी, रोस्टेड चिकन, शामी कबाब, प्लैटर्स, बेकरी प्रोडक्ट्स, केक और डेजर्ट शामिल हैं। यहाँ पारंपरिक व्यंजन जैसे 'हरीसा' और 'नदरू' (कमल ककड़ी) से बनी डिशेज भी तैयार की जाती हैं। यहाँ ऑर्डर सोशल मीडिया और फोन कॉल के जरिए लिए जाते हैं। ताज़गी पर ज़ोर देते हुए, उन्होंने बताया कि उनका किचन 'प्री-ऑर्डर' के आधार पर काम करता है, ताकि ग्राहकों के लिए खाना एकदम ताज़ा तैयार किया जा सके।
फिलहाल उनके बिज़नेस में चार से पाँच लोग काम करते हैं, जिनमें स्थायी और पार्ट-टाइम कर्मचारी शामिल हैं। उरनाइब की योजना पूरे श्रीनगर और आगे चलकर भारत के अन्य हिस्सों में भी अपना काम बढ़ाने की है। महिला उद्यमियों के लिए उनका संदेश बहुत सीधा है: "आपका जो भी शौक हो - चाहे वह सिलाई, बेकिंग, खाना बनाना, कला या कैलीग्राफी (सुलेख) हो - बस पहला कदम उठाएं और उस दिशा में काम करना शुरू कर दें। सफलता तुरंत नहीं मिलती, इसमें समय लगता है। हो सकता है कि आप कई बार असफल हों, लेकिन कभी हार न मानें।"
उरनाइब के लिए, यह सफर सिर्फ एक फूड बिज़नेस खड़ा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने के लिए प्रोत्साहित करना और दूसरों की मदद करना भी है, ताकि वे अपने हुनर को आजीविका का एक स्थायी ज़रिया बना सकें।