ISKCON misleading people on 'untimely Rath Yatra' issue: Gajapati Maharaja of Puri
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
पुरी के गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने इस्कॉन पर विदेशों में ‘असमय’ रथ यात्राओं के आयोजन को लेकर बयान जारी कर लोगों को ‘‘गुमराह करने के प्रयास’’ का आरोप लगाया।
देब ने इस्कॉन की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए रविवार को यह आरोप लगाया। इस विज्ञप्ति में कथित तौर पर दावा किया गया था कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा आयोजित करने के मुद्दे पर पुरी के विद्वान, इस्कॉन के विद्वानों के साथ हुई बहस में ‘‘पराजित’’ हो गए थे।
जगन्नाथ मंदिर प्रशासन का कहना है कि रथ यात्रा हिंदू पंचांग के अनुसार 'आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि' से शुरू होने वाली नौ दिवसीय अवधि में ही आयोजित की जानी चाहिए। वहीं, इस्कॉन का कहना है कि वह पूरे वर्ष विभिन्न स्थानों पर रथ यात्रा आयोजित करना चाहता है और इस मुद्दे पर श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के साथ चर्चा ‘‘हमेशा के लिए समाप्त’’ हो चुकी है।
गजपति महाराजा ने कहा, ‘‘मुंबई के जुहू स्थित इस्कॉन शाखा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में पूरी तरह गलत और अप्रासंगिक जानकारी दी गई है। पुरी के विद्वानों और इस्कॉन के विद्वानों के बीच पुरी के श्री नाहर (महल) में चर्चा और बहस हुई थी। लेकिन अब इस्कॉन पूरी तरह मनगढ़ंत कहानी फैला रहा है कि पुरी के विद्वान बहस हार गए।’’
उन्होंने कहा कि ‘‘असमय’’ रथ यात्रा के मुद्दे पर श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन जल्द ही कड़ा जवाब जारी करेगा।
गजपति महाराजा 12वीं सदी के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति (एसजेटीएमसी) के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि इस्कॉन की सर्वोच्च संस्था गवर्निंग बॉडी कमीशन (जीबीसी) को ‘‘असमय रथ यात्रा आयोजित कर नियमों से किए जा रहे विचलन’’ के बारे में जानकारी दी गई थी।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद इस्कॉन दुनिया के विभिन्न हिस्सों में स्नान यात्रा और रथ यात्रा का आयोजन जारी रखे हुए है।
इस बीच, इस्कॉन ओडिशा इकाई के क्षेत्रीय सचिव बनमाली दास ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यदि गजपति महाराजा को हमारी बातों से ठेस पहुंची है तो हम हृदय से उनसे क्षमा मांगते हैं। हम उनका बहुत सम्मान करते हैं। ओडिशा में हम पुरी परंपरा के अनुसार रथ यात्रा आयोजित करते हैं और निर्धारित तिथियों एवं तिथियों से कभी विचलित नहीं होते।’’