No differences with BJP leadership on Thazhamon issue: K. S. Radhakrishnan
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता के.एस. राधाकृष्णन ने सोमवार को कहा कि शबरिमला मंदिर के ‘तंत्री’ (मुख्य पुजारी) पद पर थाझामोन परिवार के वंशानुगत अधिकार को खत्म करने की उनकी मांग को लेकर उनके और पार्टी के राज्य नेतृत्व के बीच कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी का रुख मंदिर की परंपराओं की गरिमा की रक्षा करना है।
अपनी टिप्पणियों को लेकर राज्य नेतृत्व के साथ उनके मतभेद पैदा होने के संबंध में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि सभी मंदिरों की धार्मिक पवित्रता और रीति-रिवाजों की रक्षा के मामले में भाजपा की नीति स्पष्ट और एक जैसी रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा का रुख किसी एक मंदिर तक सीमित नहीं है। पार्टी की नीति सभी मंदिरों में परंपराओं की गरिमा की रक्षा करना है। चूंकि मंदिर से जुड़े मामलों पर भाजपा की नीति मजबूत और स्पष्ट है इसलिए पार्टी के भीतर ऐसे मुद्दों पर बार-बार चर्चा करने की कोई जरूरत नहीं है।’’
शबरिमला में सोना गायब होने के मामले में जमानत पर रिहा शबरिमला के तंत्री कंडारारु राजीवरु से भाजपा नेताओं की मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर राधाकृष्णन ने कहा कि ऐसी मुलाक़ातें निजी रिश्तों की वजह से होती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘निजी रिश्ते हो सकते हैं। कोई भी व्यक्ति उस आधार पर किसी से भी मिल सकता है।’’
वंशानुगत परंपरा को खत्म करने की अपनी मांग को दोहराते हुए राधाकृष्णन ने आरोप लगाया कि मौजूदा तंत्री, कंडारारु राजीवरु, शबरिमला में सोना गायब होने की घटना से जुड़े दो मामलों में आरोपी थे।
उन्होंने कहा कि तंत्री का पद स्वत: पिता से बेटे को नहीं मिलना चाहिए और सिर्फ योग्य और सक्षम लोगों को ही इस पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले लेने का अधिकार त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) के पास है।
रविवार को राधाकृष्णन ने मांग की थी कि थाझामोन परिवार को वंशानुगत तंत्री के पद से हटा दिया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस परिवार ने मंदिर और लाखों अयप्पा भक्तों की बदनामी कराई है।