आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) ने बुधवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि वह निर्वाचन आयोग को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक धड़े को आवंटित ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न पर रोक लगाने का निर्देश दे।
निर्वाचन आयोग ने हाल में नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व वाले आईएसएफ को ‘लिफाफा’ चिह्न के बजाय ‘अलमारी’ चिह्न आवंटित किया है। आईएसएफ ने 2024 का लोकसभा चुनाव और पश्चिम बंगाल में इस साल अप्रैल में हुआ विधानसभा चुनाव ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न पर लड़ा था।
निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने वाली आईएसएफ ने सवाल उठाया कि क्या निर्वाचन निकाय ने किसी दूसरी पार्टी को यह चुनाव चिह्न आवंटित करने में अपनी शक्तियों का उचित और तर्कसंगत रूप से इस्तेमाल किया था।
आयोग की ओर से पेश वकील अनामिका पांडे ने दलील दी कि आईएसएफ एक गैर-पंजीकृत राजनीतिक दल है और इसलिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस जैसे मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के विपरीत, इसके पास किसी चुनाव चिह्न को बनाए रखने का अधिकार नहीं है।