आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को चेतावनी दी कि अगर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के फायदे के लिए मतदाता सूची में “हेराफेरी” को नहीं रोका गया तो भारत के एक विफल राष्ट्र बनने का खतरा है।
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की उस खबर पर प्रतिक्रिया दे रही थीं जिसमें कहा गया था कि मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) के दौरान दो निर्वाचन आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार निर्वाचन आयोग के कदमों पर आपत्ति जताई थी।
अधिकारियों ने बताया कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची को ठीक करने के दौरान कई राज्यों में नाम हटाने समेत कई मुद्दों की ओर ध्यान दिलाया था, लेकिन पूरे देश में एसआईआर से जुड़े फैसलों पर निर्वाचन आयोग की राय एक थी।
महबूबा ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में पड़ोसी देश से तुलना करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि दोनों पड़ोसी देश – भारत और पाकिस्तान – एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं और इस बात की होड़ लगी है कि कौन अपने ही लोगों और अपने देश को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारा देश भारत, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है और जिसके बारे में हमारे प्रधानमंत्री विदेश में गर्व से कहते हैं कि यह ‘लोकतंत्र की जननी’ है, आज उसी भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद यानी चुनावी प्रक्रिया को ही कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। ऐसा मतदाता सूची में हेरफेर करके किया जा रहा है – और इस बात की ओर इन दो चुनाव आयुक्तों ने इशारा किया है।”
महबूबा ने कहा कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे और “मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का काम भाजपा की मर्जी से होता रहा, तो इस बात का खतरा है कि एक समय ऐसा आएगा जब हमारा देश, जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, एक विफल राष्ट्र बन जाएगा।”
उन्होंने कहा कि 30 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के मसौदे से लगभग 13 करोड़ नाम बड़े पैमाने पर हटाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा हमला था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं यही तो कह रही हूं कि अगर ऐसा ही चलता रहा, और अगर हमारे पास इन दो चुनाव आयुक्तों जैसे लोग नहीं हुए... मैं अभी उनके नाम नहीं लूंगी। कौन जाने उन्हें किस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है - हो सकता है कि उन पर ईडी या आयकर के छापे पड़ें, या इससे भी बुरा कुछ हो। लेकिन अगर ऐसा ही चलता रहा, तो एक समय ऐसा आएगा जब हम एक विफल राष्ट्र जैसे हो जाएंगे और लोकतंत्र बिल्कुल नहीं बचेगा।”