आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के मद्देनजर तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) का लाभ प्रभावित होने की आशंका है क्योंकि मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने के लिए वे पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर रख सकती हैं। रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बुधवार को यह बात कही।
अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। सप्ताह की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई थी क्योंकि वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा संभालने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद था। बाद में बुधवार को कीमतें घटकर करीब 88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं।
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने 2026 के लिए ब्रेंट कच्चे तेल की औसत कीमत का अनुमान पांच डॉलर बढ़ाकर 65 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है।
एजेंसी के अनुसार, भारत को अपनी कच्चे तेल की जरूरतें पूरी करने के लिए समुद्री मार्गों पर निर्भर रहना पड़ेगा, हालांकि आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने की कुछ गुंजाइश है। भारत पहले भी एशिया के बाहर रूस और दक्षिण अमेरिका जैसे क्षेत्रों से तेल खरीदता रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार रूस से भारत का आयात फिलहाल करीब 11 लाख बैरल प्रतिदिन है जबकि वेनेजुएला से आयात पिछले महीने फिर शुरू हुआ और यह लगभग 1,42,000 बैरल प्रतिदिन पर पहुंच गया है।