इस्लाम पर अजीत डोभाल के वक्तव्य का बुद्धिजीवियों ने किया स्वागत

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari • 1 Months ago
इस्लाम पर अजीत डोभाल के वक्तव्य का बुद्धिजीवियों ने किया स्वागत
शुजात अली कादरी/ नई दिल्ली 

“चरमपंथ और आतंकवाद हैं इस्लाम के खिलाफ, क्योंकि इस्लाम का मतलब शांति और खुशहाली होती है.” भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने यह वक्तव्य इंडोनेशियाई और भारतीय उलेमाओं से खचाखच भरे इंडिया इस्लामिक कल्चर सेंटर के बीएस अब्दुर्रहमान ऑडिटोरियम में दिया. 

देश और विदेश के दानिश्वरमंदों के सामने इस्लाम के सही मायनों और तस्वीर को एनएसए अजीत डोभाल ने बेहद खुबसूरती के साथ पेश किया. उन्होंने बेहतर अंदाज में इस्लाम की खासियत को बयान करते हुए कहा कि- ‘इस्लाम शांति का मजहब है जो कहता है कि एक इंसान का कत्ल सारी इंसानियत के कत्ल के बराबर है.’ उन्होंने इस्लाम धर्म में ‘जिहाद’ के सच्चे अर्थों को भी दुनिया को बताया. उन्होंने कहा कि “नफ़्स के खिलाफ जिहाद अफ़ज़ल है”.
 
एनएसए डोभाल ‘द रोल ऑफ उलेमा इन फोस्टरिंग ए कल्चर ऑफ इंटरफेथ पीस एंड सोशल हार्मोनी इन इंडिया एंड इंडोनेशिया’ नामक विषय पर आयोजित कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आगे कहा कि- ‘धर्म का संकीर्ण प्रयोग नहीं होना चाहिए. प्रोपेगेंडा और नफरत से निपटने के लिए उलेमाओं को टेक्नोलोजी का भी प्रयोग करना चाहिए. लोकतंत्र में हेट स्पीच, पक्षपात, प्रोपेगेंडा, हिंसा और धर्म के दुरुपयोग का कोई स्थान नहीं.’
 
देश के मौजूदा परिदृश्य में एनएसए डोभाल का यह वक्तव्य को भारत की मुस्लिम आवाम एक भरोसा और उम्मीद की तरह देख रही है। वरिष्ठ पत्रकार और स्कॉलर डॉ. जफरूद्दीन बरकाती ने कहा कि बेशक इस्लाम शांति का पैगाम देता है. इससे ही पूरी दुनिया में शांति कायम हो सकती है. हमें किसी भी हाल में हक़ पर क़ायम रहना ही चाहिए.
 
 एनएसए का बयान उसी संदर्भ में दिया गया अच्छा वक्तव्य है. वहीं पत्रकार वसीम अकरम त्यागी ने कहा कि अजीत डोभाल का वक्तव्य कई मायनो में बेहतर है. ऐसी बातें भारत के लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं और मूल्यों को और ज्यादा मजबूत करती हैं तथा समाज के सभी वर्गों को एक संदेश भी देती हैं कि सहिष्णुता, सद्भाव और शांतिपूर्ण, सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने और सहयोग के साथ आगे बढ़ा जा सकता है.
 
वहीं सामाजिक कार्यकर्ता और जामिया के स्कॉलर राहुल कपूर ने कहा कि अजीत डोभाल का बयान स्वागत योग्य है. अगर हम चाहते हैं कि समाज में आपसी भाईचारा और सौहार्द बने तो हमें एक-दूसरे पर भरोसा और एक-दूसरे के धर्मों का आदर और सम्मान करना होगा. 
 
राहुल कपूर ने इस बात पर भी जोर दिया कि देश के सभी धर्मगुरूओं को भी इसी तरह एक मंच पर आकर संवाद कि प्रक्रिया को बढ़ाना चाहिए, जिससे आपसी सौहार्द और भाईचारे को देश के अंदर मजबूती प्रदान की जा सके.
 
शोध छात्र वकार अहमद ने कहा कि ऐसे वक्तव्यों का स्वागत होना चाहिए और खुले तौर पर इसकी तारीफ सभी को करनी चाहिए। मौजूदा सियासी हालात में इस्लामोफोबिया से ग्रसित लोग जब मुस्लिमों को लक्षित करते है, वहां इस्लाम की सुंदरता का बखान करना यह बताता है कि सिस्टम में खराबी नहीं है. यह समावेशी नीति का उदाहरण हो सकता है. 
 
जामिया के छात्र हम्माद और अर्सलान ने कहा कि इस बात से कोई मतलब नहीं है कि मीडिया में दक्षिणपंथी विचारधारा के लोग क्या बयान देते हैं. मायने यह रखता है कि सिस्टम के लोग मुस्लिमों के बारे में क्या सोचते हैं. अगर सिस्टम मुस्लिमों के प्रति पक्षपाती नहीं है तो, मुस्लिम समुदाय के लिए इससे अच्छी बात कुछ और नहीं हो सकती है.