बैरकपुर जूट बेल्ट में उद्योग और कानून व्यवस्था मुद्दा

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 27-04-2026
Industry and law and order issue in Barrackpur jute belt
Industry and law and order issue in Barrackpur jute belt

 

कोलकाता
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के जूट उद्योग क्षेत्र में इस बार चुनावी माहौल पूरी तरह से औद्योगिक संकट और कानून-व्यवस्था के मुद्दों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। खासकर नोआपाड़ा, भाटपाड़ा और बैरकपुर विधानसभा सीटों पर राजनीतिक मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है, जहां भाजपा नेता अर्जुन सिंह और उनके पूर्व सहयोगी से प्रतिद्वंद्वी बने तृणमूल कांग्रेस सांसद पार्थ भौमिक के बीच टकराव प्रमुख चर्चा का विषय बना हुआ है।
बैरकपुर लोकसभा सीट से पूर्व सांसद रहे अर्जुन सिंह इस बार नोआपाड़ा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने क्षेत्र के जूट मिलों की समस्याओं को हल करने का वादा किया है। उनका मुकाबला तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार त्रिणांकुर भट्टाचार्य से है, जिन्हें मौजूदा विधायक मंजू बसु की जगह टिकट दिया गया है।
 
पिछले चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने बैरकपुर और नोआपाड़ा सीट जीती थी, जबकि भाटपाड़ा में भाजपा ने 2019 के उपचुनाव और 2021 विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। भाजपा ने इस बार भाटपाड़ा से अर्जुन सिंह के बेटे पवन सिंह को उम्मीदवार बनाया है।
 
भाटपाड़ा, जो कभी संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र माना जाता था, अब हिंसा और गैंगवार के लिए बदनाम हो चुका है। यहां लगातार होने वाली झड़पों और हिंसक घटनाओं ने स्थानीय लोगों के बीच भय का माहौल बना रखा है। अर्जुन सिंह और पार्थ भौमिक दोनों ही एक-दूसरे पर इस हिंसा के लिए आरोप लगाते रहे हैं।
 
कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए ही 2012 में बैरकपुर पुलिस आयुक्तालय का गठन किया गया था, जो हुगली नदी के किनारे स्थित इस औद्योगिक क्षेत्र को कवर करता है। यह कदम ममता बनर्जी की सरकार बनने के बाद उठाया गया था।
 
बैरकपुर सीट पर तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर अभिनेता-राजनेता राज चक्रवर्ती को उम्मीदवार बनाया है, जिन्होंने 2021 में 9,000 से अधिक वोटों से जीत हासिल की थी। उनके सामने भाजपा ने वकील कौस्तव बागची को मैदान में उतारा है, जिससे इस शहरी सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
 
स्थानीय मुद्दों की बात करें तो जूट मिलों के बंद होने से रोजगार पर असर पड़ा है, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ा है। एक स्थानीय फैक्ट्री कर्मचारी के अनुसार, मिलों के बंद होने से कुछ लोग गलत रास्तों पर जाने को मजबूर हुए हैं, जिससे अपराध और तनाव बढ़ा है।
इसके अलावा निर्माण सामग्री जैसे बालू और पत्थर की सप्लाई के कारोबार में प्रतिस्पर्धा भी कई बार हिंसक झड़पों का कारण बनती है, जो बाद में राजनीतिक रंग ले लेती है। एक स्थानीय वामपंथी कार्यकर्ता का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस द्वारा मौजूदा विधायक मंजू बसु को टिकट न देने से पार्टी के भीतर भी असंतोष है।
हालांकि, तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि पार्टी का फैसला अंतिम होता है और इसका चुनाव परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पार्टी को भरोसा है कि उसके उम्मीदवार पहले से अधिक अंतर से जीत दर्ज करेंगे।
वहीं भाजपा को उम्मीद है कि तृणमूल के भीतर की गुटबाजी और चुनाव आयोग की सख्ती से निष्पक्ष मतदान होने पर उसे फायदा मिलेगा। अर्जुन सिंह को एक मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है, हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव में उन्हें पार्थ भौमिक से हार का सामना करना पड़ा था।
क्षेत्र के बुजुर्ग निवासियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। लोगों को उम्मीद है कि इस बार चुनाव शांतिपूर्ण होंगे।
चुनाव प्रचार के दौरान मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर भी भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं, जिससे चुनावी माहौल और गर्मा गया है।