आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को अहमदाबाद में प्रवचनकर्ता आसाराम के आश्रम को आवंटित भूमि पर चार मई तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। गुजरात सरकार 2030 राष्ट्रमंडल खेलों से पहले खेल अवसंरचना विकसित करने के लिए इस भूमि को अपने नियंत्रण में लेना चाहती है।
मोटेरा में नरेन्द्र मोदी स्टेडियम के पास स्थित आश्रम की 45,000 वर्ग मीटर से अधिक भूमि का उपयोग प्रस्तावित सरदार पटेल खेल परिसर के लिए किया जाना है।
आश्रम का प्रबंधन करने वाले संत श्री आसाराम ट्रस्ट ने भूमि अधिग्रहण के खिलाफ अपनी अपील खारिज करने वाले गुजरात उच्च न्यायालय के 17 अप्रैल के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने पट्टे की शर्तों के उल्लंघन और अतिक्रमण के आधार पर ट्रस्ट की अपील खारिज कर दी थी।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने गुजरात सरकार से विवादित भूमि से संबंधित सभी प्रासंगिक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा, क्योंकि प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि आसाराम के ट्रस्ट को नोटिस नहीं भेजे गए थे।
पीठ ने सॉलिसिटर जनरल को तीन दिनों के भीतर सभी संबंधित रिकॉर्ड दाखिल करने का निर्देश दिया और ट्रस्ट को तीन दिन का अतिरिक्त समय देते हुए अगली सुनवाई तक विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।
पीठ मामले की अगली सुनवाई सोमवार को करेगी।
न्यायमूर्ति मेहता ने गुजरात सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता ट्रस्ट को नोटिस नहीं भेजे गए थे।
मेहता ने कहा कि पट्टे की शर्तों का कई बार उल्लंघन हुआ है और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया गया है। मेहता ने कहा कि उचित नोटिस जारी किए गए थे।