भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी: हनोई में एनएसए अजित डोभाल की अहम वार्ता

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 02-11-2026
India-Vietnam Defence Partnership: NSA Ajit Doval Holds Key Talks in Hanoi
India-Vietnam Defence Partnership: NSA Ajit Doval Holds Key Talks in Hanoi

 

हनोई

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने वियतनाम की राजधानी हनोई में वहां के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस उच्चस्तरीय मुलाकात का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और अधिक मजबूत बनाना है। वियतनाम में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' के जरिए इस यात्रा और बैठक की जानकारी साझा की।

रक्षा और रणनीतिक संबंधों को नई रफ्तार

एनएसए अजित डोभाल रविवार को आधिकारिक दौरे पर हनोई पहुंचे थे। अपनी इस यात्रा के दौरान वह वियतनाम के शीर्ष नेतृत्व के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। इस बातचीत का मुख्य फोकस दोनों देशों के बीच विस्तारित व्यापक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करना और सहयोग के नए आयाम तलाशना है।

भारत और वियतनाम के द्विपक्षीय संबंधों को मई 2026 में एक नया आयाम मिला था, जब वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने रिश्तों को 'विस्तारित व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक पहुंचाया था। इस साझेदारी के तहत भारत के 'विकसित भारत 2047' और वियतनाम के 'विजन 2045' के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए आर्थिक, तकनीकी और क्षेत्रीय स्थिरता के मोर्चे पर मिलकर काम करने पर जोर दिया जा रहा है।

सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर विशेष फोकस

यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश सुरक्षा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में आपसी तालमेल तेजी से बढ़ा रहे हैं। पिछले महीने ही नई दिल्ली में भारत और वियतनाम के बीच सुरक्षा संवाद का चौथा संस्करण आयोजित किया गया था, जिसकी सह-अध्यक्षता भारत के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पवन कपूर और वियतनाम के उप मंत्री जनरल फाम थे तुंग ने की थी।

दोनों देश पारंपरिक सुरक्षा के साथ-साथ आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा, समुद्री व्यापारिक मार्गों की रक्षा और उभरती हुई नई तकनीकों के मोर्चे पर मिलकर काम कर रहे हैं। वर्ष 2030 तक के लिए तय किए गए 'भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी संयुक्त दृष्टिकोण वक्तव्य' के प्रभावी क्रियान्वयन से दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को एक स्पष्ट दिशा मिल रही है।

हालांकि, ताजा बैठक में रक्षा सहयोग से जुड़ी किन नई विशिष्ट परियोजनाओं पर सहमति बनी है, इसके विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन यह उच्चस्तरीय संवाद हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों के बढ़ते रणनीतिक भरोसे और गहरे होते रिश्तों को साफ तौर पर रेखांकित करता है।