आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारत के पास एक समृद्ध, विविध और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी पर्यटन क्षेत्र है, लेकिन इसकी पूरी क्षमता अभी भी ‘नियामक जटिलता’ और अंतरराष्ट्रीय पहुंच की अड़चनों के कारण सीमित बनी हुई है। मंगलवार को जारी एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट में यह बात कही गई।
नीति आयोग और पर्यटन मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई इस रिपोर्ट में पर्यटन क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में कई तरह के सुधारों की सिफारिशें की गई हैं जिनमें ‘‘अखिल भारतीय पर्यटक परमिट वाले मोटर वाहनों पर राज्य स्तर पर प्रवेश कर/शुल्क को हटाना’’ और इस परमिट की न्यूनतम वैधता को 90 दिनों से बढ़ाकर 1 वर्ष करना शामिल हैं।
रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि ‘‘राज्यों के अनुरोध पर, पर्यटन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए पर्यावरण संबंधी मंजूरी देने के आवेदनों की समीक्षा के लिए एक समर्पित विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति का गठन किया जाए’’; और साथ ही होमस्टे इकाइयों में कमरों की संख्या की सीमा को ‘‘छह से बढ़ाकर नौ’’ तक किया जाए।
इस रिपोर्ट को केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की उपस्थिति में ‘द अशोक’ होटल में आयोजित एक कार्यक्रम में जारी किया गया।
‘पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में विकास के रास्ते खोलना’ (अनलॉकिंग ग्रोथ इन टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी सेक्टर) शीर्षक वाली लगभग 100 पन्नों की इस रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘भारत का पर्यटन क्षेत्र इस समय विकास के एक अहम दौर में हैं। हालांकि देश के पास एक समृद्ध, विविध और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी पर्यटन है, लेकिन इसकी पूरी क्षमता नियामक जटिलता और अंतरराष्ट्रीय पहुंच की अड़चनों के कारण सीमित है।’’
इसमें कहा गया कि विकास के रास्ते खोलने, प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और वैश्विक पर्यटन में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए इन कुछ अड़चनों को दूर करना बेहद जरूरी है।
इस रिपोर्ट का विश्लेषण रेखांकित करता है कि ‘‘समस्या मांग या बुनियादी संपत्तियों (पर्यटन स्थलों) की कमी की नहीं है, बल्कि अनुकूल परिस्थितियों को सक्षम बनाने की है।’’