India's student housing sector offers strong long-term investment opportunity amid APAC living boom: Knight Frank
मुंबई (महाराष्ट्र)
नाइट फ्रैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दशक में एशिया-पैसिफिक (APAC) के 'लिविंग सेक्टर' (रहने की जगह से जुड़े सेक्टर) में इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट लगभग तीन गुना बढ़कर 21 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। इसमें भारत का 'पर्पस-बिल्ट स्टूडेंट एकोमोडेशन' (PBSA) यानी छात्रों के लिए खास तौर पर बनाए गए आवास का सेक्टर, लंबे समय में विकास के एक अहम मौके के तौर पर उभर रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016 और 2025 के बीच APAC के लिविंग सेक्टर में इन्वेस्टमेंट काफी बढ़ा है, जिसकी वजह वैकल्पिक रेजिडेंशियल रियल एस्टेट में इन्वेस्टर्स की बढ़ती दिलचस्पी है। इसमें यह भी कहा गया है कि भारत की अच्छी डेमोग्राफिक्स (जनसांख्यिकी), हायर एजुकेशन सेक्टर का विस्तार और सपोर्टिव पॉलिसी रिफॉर्म्स इसे इस ट्रेंड का फायदा उठाने की अच्छी स्थिति में लाते हैं।
भारत में 18-23 साल की उम्र के लगभग 155 मिलियन लोग हैं, जिनमें हायर एजुकेशन में एनरोल हुए लगभग 53 मिलियन छात्र शामिल हैं। सरकार के 50 प्रतिशत के ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो (GER) के लक्ष्य के साथ, 2035 तक हायर एजुकेशन लेने वाले छात्रों की संख्या 70 मिलियन से अधिक होने की उम्मीद है, जिससे छात्रों के लिए खास तौर पर बनाए गए आवास की भारी मांग पैदा होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि वीज़ा के कड़े नियमों और विदेश में पढ़ाई के बढ़ते खर्च के कारण ज़्यादा छात्र भारत में ही हायर एजुकेशन लेने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि ऑफशोर कैंपस के ज़रिए प्रमुख इंटरनेशनल यूनिवर्सिटीज़ के आने से भी प्रोफेशनली मैनेज्ड स्टूडेंट एकोमोडेशन की मांग बढ़ने की उम्मीद है।
नाइट फ्रैंक के अनुसार, इंटरस्टेट माइग्रेशन (एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने) में शिक्षा की हिस्सेदारी लगभग 15-17 प्रतिशत है, जिसके परिणामस्वरूप 2035 तक 12 मिलियन से अधिक छात्रों के लिए आवास की संभावित मांग होगी।
नाइट फ्रैंक इंडिया के इंटरनेशनल पार्टनर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल ने कहा कि भारत की मज़बूत डेमोग्राफिक्स, बढ़ता हायर एजुकेशन इकोसिस्टम और छात्रों की बढ़ती मोबिलिटी (आवाजाही) प्रोफेशनली मैनेज्ड स्टूडेंट हाउसिंग की लगातार मांग को बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि इससे ज़्यादा इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट आने और हाई-क्वालिटी वाले पर्पस-बिल्ट आवास के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि रियल एस्टेट में कुल फंडरेज़िंग में 5.9 प्रतिशत की गिरावट के बावजूद, 2025 में APAC लिविंग सेक्टर में लगाया गया इंस्टीट्यूशनल कैपिटल 12 प्रतिशत बढ़ा। हालांकि 2026 की पहली छमाही के दौरान लिविंग सेक्टर में इन्वेस्टमेंट साल-दर-साल लगभग 10 प्रतिशत गिरा, लेकिन नाइट फ्रैंक को उम्मीद है कि साल के बाकी महीनों में ट्रांज़ैक्शन एक्टिविटी बढ़ेगी। इसमें यह भी कहा गया है कि आबादी से जुड़े ट्रेंड, लोगों की बढ़ती आवाजाही और प्रोफेशनली मैनेज्ड हाउसिंग की बढ़ती मांग से को-लिविंग, सीनियर हाउसिंग और स्टूडेंट अकोमोडेशन जैसे सेगमेंट में इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा मिलता रहेगा।