नई दिल्ली
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा है कि भारत को अमेरिकी नेतृत्व वाले Pax Silica पहल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाना यह दर्शाता है कि देश को महत्वपूर्ण तकनीकी आपूर्ति श्रृंखलाओं में भरोसेमंद साझेदार के रूप में वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली है।
कृष्णन ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव इस समय वॉशिंगटन में महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) पर बैठक में शामिल हैं। उन्होंने कहा, "रणनीतिक दृष्टिकोण से यह महत्वपूर्ण है कि भारत इन सभी महत्वपूर्ण मुद्दों में ‘हाई टेबल’ पर मौजूद रहे।"
Pax Silica अमेरिकी नेतृत्व वाली एक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य सिलिकॉन, उन्नत विनिर्माण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा करना है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोरे ने सोमवार को घोषणा की कि भारत को अगले महीने इस पहल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
कृष्णन ने नासकॉम द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा कि भारत AI के वैश्विक उपयोग के मामले (use case) की राजधानी बनने का लक्ष्य रखता है। सरकार अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए खुलेपन और स्वदेशी AI क्षमताओं के निर्माण में संतुलित दृष्टिकोण अपना रही है।
कृष्णन ने बताया कि भारत प्रौद्योगिकी‑एग्नॉस्टिक (vendor-neutral) खरीद नीति अपनाएगा। इसका मतलब है कि भारत केवल NVIDIA जैसी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि किसी भी निर्माता के चिप्स का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने DeepSeek जैसी हाल की पहल का उदाहरण दिया, जिससे यह साबित हुआ कि AI विकास अपेक्षाकृत कम खर्च में किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने हाल ही में 12 स्टार्टअप और संस्थानों के साथ बैठक कर भारत के पहले फाउंडेशन मॉडल्स तैयार करने की दिशा में पहल की। इससे देश की स्वदेशी AI क्षमता मजबूत होगी।
कृष्णन ने कहा कि भारत का वैश्विक सेमीकंडक्टर डिज़ाइन क्षेत्र में योगदान 20% है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत फैब और एडवांस्ड पैकेजिंग फैसिलिटी ऑर्डर प्राप्त कर रही हैं और कुछ पूरी उत्पादन क्षमता निर्यात की योजना बना रही हैं।
सचिव ने जोर देकर कहा कि भारत का खुला सिस्टम और रणनीतिक स्वायत्तता वैश्विक हित में है। यह सुनिश्चित करता है कि दुनिया के कई देशों के लिए और एक अतिरिक्त उत्पादन लाइन उपलब्ध हो।