भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने रचा हरित परिवहन का नया इतिहास

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 24-07-2026
India's first hydrogen train scripts a new history of green transport.
India's first hydrogen train scripts a new history of green transport.

 

जींद (हरियाणा)

भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित यात्री ट्रेन ने व्यावसायिक संचालन के शुरुआती दिनों में ही उल्लेखनीय सफलता हासिल कर देश के रेल इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 जुलाई को हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर इस ट्रेन का शुभारंभ किए जाने के बाद पहले पांच दिनों में इसने लगभग 900 किलोमीटर का सफल संचालन किया। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिन्होंने अत्याधुनिक हाइड्रोजन रेल तकनीक को सफलतापूर्वक सार्वजनिक परिवहन में अपनाया है।

यह ट्रेन न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है, बल्कि भारतीय रेलवे के हरित और आत्मनिर्भर भविष्य की नई तस्वीर भी पेश कर रही है।

डीजल इंजन की जगह आधुनिक हाइड्रोजन तकनीक

नई हाइड्रोजन ट्रेन में पारंपरिक डीजल इंजन की जगह दो अत्याधुनिक 1,200 किलोवाट क्षमता वाले हाइड्रोजन-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम लगाए गए हैं। इनकी मदद से ट्रेन बिना डीजल के संचालन करने में सक्षम है।

हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है, जिससे ट्रेन चलती है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वातावरण में धुआं, कार्बन डाइऑक्साइड या अन्य प्रदूषक गैसें नहीं निकलतीं। इसके प्रत्यक्ष उप-उत्पाद केवल जलवाष्प (वाटर वेपर) और ऊष्मा (हीट) हैं।

यही वजह है कि इसे शून्य-उत्सर्जन (Zero Emission) तकनीक पर आधारित ट्रेन माना जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक भविष्य के स्वच्छ परिवहन की आधारशिला बन सकती है। डीजल से चलने वाली ट्रेनों की तुलना में यह तकनीक वायु प्रदूषण को पूरी तरह समाप्त करने में सक्षम है।

भारत सरकार लंबे समय से कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। ऐसे में हाइड्रोजन ट्रेन का सफल संचालन देश के हरित परिवहन मिशन को नई गति देने वाला कदम माना जा रहा है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक से न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि भविष्य में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता भी घटेगी।

यात्रियों पर नहीं बढ़ा किराए का बोझ

नई तकनीक अपनाने के बावजूद रेलवे ने यात्रियों पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला है।हाइड्रोजन ट्रेन का किराया सामान्य डीएमयू (डीजल मल्टीपल यूनिट) ट्रेनों के बराबर ही रखा गया है। यात्रियों को दूरी के अनुसार 10 रुपये से 25 रुपये तक का किराया देना पड़ रहा है।रेलवे का कहना है कि स्वच्छ और आधुनिक तकनीक का लाभ केवल बड़े शहरों या विशेष वर्ग तक सीमित न रहकर आम नागरिकों तक पहुंचे, इसलिए किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई।

10 डिब्बों वाली आधुनिक ट्रेन

यह हाइड्रोजन ट्रेन 10 कोचों वाली यात्री ट्रेन है, जिसे विशेष रूप से कम लागत और अधिक पर्यावरण-अनुकूल परिवहन के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

ट्रेन के संचालन के लिए हरियाणा के जींद में स्वदेशी तकनीक से विकसित हाइड्रोजन भंडारण और रीफ्यूलिंग स्टेशन भी स्थापित किया गया है। यह सुविधा ट्रेन के नियमित और सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करती है।

रेलवे का कहना है कि देश में ही विकसित इस बुनियादी ढांचे से भविष्य में हाइड्रोजन ट्रेनों का विस्तार और आसान होगा तथा विदेशी तकनीक पर निर्भरता भी कम होगी।

ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मिलेगा बढ़ावा

हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन भारत सरकार के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को भी मजबूती प्रदान करेगा।इस मिशन का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और भारत को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाना है।

रेलवे का मानना है कि यदि भविष्य में अधिक रेल मार्गों पर ऐसी ट्रेनों का संचालन शुरू होता है तो इससे डीजल की खपत में बड़ी कमी आएगी और विदेशी ईंधन आयात पर होने वाला खर्च भी घटेगा।

भारतीय रेलवे के लिए नई दिशा

रेल विशेषज्ञों के अनुसार, जींद-सोनीपत मार्ग पर हाइड्रोजन ट्रेन का सफल संचालन आने वाले वर्षों में भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की नई दिशा तय कर सकता है।यदि यह मॉडल लंबे समय तक सफल रहता है तो देश के अन्य राज्यों में भी चरणबद्ध तरीके से हाइड्रोजन आधारित ट्रेनों का संचालन शुरू किया जा सकता है। इससे न केवल रेलवे का कार्बन फुटप्रिंट कम होगा, बल्कि भारत की जलवायु परिवर्तन से निपटने की प्रतिबद्धता भी मजबूत होगी।

वैश्विक स्तर पर मजबूत हुई भारत की पहचान

हाइड्रोजन रेल तकनीक को सफलतापूर्वक अपनाकर भारत ने स्वच्छ परिवहन के क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता का भी प्रदर्शन किया है। अब भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जहां हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित यात्री ट्रेनें व्यावसायिक रूप से संचालित हो रही हैं।

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि जींद-सोनीपत मार्ग पर मिली सफलता भविष्य में देशभर में स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर परिवहन प्रणाली विकसित करने के लिए एक प्रभावी मॉडल साबित होगी। यह परियोजना न केवल पर्यावरण संरक्षण बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी आत्मनिर्भरता और टिकाऊ विकास की दिशा में भी भारत के बढ़ते कदमों का महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है।