भारत का रक्षा दशक: आत्मनिर्भरता से वैश्विक शक्ति तक
Story by आवाज़ द वॉयस | Published by onikamaheshwari | Date 17-06-2026
India's Defence Decade: From Indigenous Weapons to Diplomacy, Strengthening New Delhi's Strategic Position Ahead of 2047 Goal
नई दिल्ली
पिछले 12 वर्षों में भारत के रक्षा क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है। सरकार ने स्वदेशी रक्षा उत्पादन, सैन्य आधुनिकीकरण, रक्षा कूटनीति और वैश्विक साझेदारियों को मजबूत कर देश को रणनीतिक रूप से अधिक सक्षम बनाने की दिशा में तेज़ी से काम किया है। रक्षा कूटनीति आज भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक प्रभाव का महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुकी है। भारत ने अमेरिका, रूस, यूरोप, जापान, यूएई और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देशों के साथ रक्षा सहयोग को बढ़ाया है, जबकि अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता (Strategic Autonomy) को भी बनाए रखा है।
अमेरिका और अन्य प्रमुख साझेदारियों में विस्तार
भारत-अमेरिका रक्षा संबंध पिछले दशक में कई अहम समझौतों के माध्यम से मजबूत हुए हैं, जिनमें LEMOA (2016), COMCASA (2018) और BECA (2020) शामिल हैं। इसके अलावा भारत को अमेरिका द्वारा “Major Defence Partner” का दर्जा और STA-1 श्रेणी भी दी गई। 2023 में शुरू हुई iCET पहल और 2025 में TRUST फ्रेमवर्क ने उभरती तकनीकों में सहयोग को और आगे बढ़ाया। 2025 में दोनों देशों के बीच 10 वर्षीय रक्षा साझेदारी समझौता भी हुआ।
रूस, यूरोप और अन्य देशों के साथ सहयोग
भारत-रूस रक्षा संबंध S-400 वायु रक्षा प्रणाली और Su-30MKI अपग्रेड जैसे प्रोजेक्ट्स पर आधारित रहे हैं, हालांकि अब यह सहयोग धीरे-धीरे को-प्रोडक्शन और तकनीकी साझेदारी की ओर बढ़ रहा है। जनवरी 2026 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी समझौता हुआ, जिसमें साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और अंतरिक्ष सहयोग शामिल है। फ्रांस के साथ राफेल विमान और स्कॉर्पीन पनडुब्बी परियोजनाएं जारी हैं, जबकि जापान, यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ भी रक्षा सहयोग बढ़ा है।
बहुपक्षीय मंचों पर भारत की भूमिका
भारत QUAD, SCO और ADMM-Plus जैसे मंचों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। क्वाड के तहत मालाबार नौसैनिक अभ्यास और “Quad-at-Sea Mission 2025” जैसे अभ्यासों ने सहयोग को नई दिशा दी है।
ASEAN देशों के साथ भी भारत का रक्षा सहयोग बढ़ा है, विशेषकर वियतनाम, फिलीपींस और इंडोनेशिया के साथ।
स्वदेशी रक्षा उत्पादन में तेज़ वृद्धि
भारत ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो अब तक का रिकॉर्ड है।
रक्षा निर्यात भी बढ़कर ₹38,424 करोड़ तक पहुंच गया है।
आधुनिक तकनीक और स्वदेशी हथियार प्रणाली
भारत ने मिशन शक्ति (2019) और मिशन दिव्यास्त्र (2024) के माध्यम से अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
DRDO द्वारा विकसित आकाश मिसाइल, ब्रह्मोस, एंटी-ड्रोन सिस्टम, तेजस लड़ाकू विमान और अर्जुन टैंक जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म सेना में शामिल किए जा रहे हैं।
हाइपरसोनिक तकनीक, AI आधारित रक्षा प्रणाली और स्क्रैमजेट इंजन जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से प्रगति हो रही है।
अग्निपथ योजना और सैन्य आधुनिकीकरण
2022 में शुरू हुई अग्निपथ योजना के तहत युवा और तकनीक-आधारित सेना तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। अग्निवीरों को प्रशिक्षण के साथ कौशल विकास और प्रमाणन भी दिया जा रहा है।
2047 के लक्ष्य की ओर
रक्षा मंत्रालय के अनुसार भारत की रक्षा यात्रा केवल आधुनिकीकरण नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और वैश्विक सुरक्षा भागीदार बनने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 2047 तक भारत को एक मजबूत, नवाचार-आधारित और आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि सरकार की नीतियों, निजी क्षेत्र की भागीदारी और सभी हितधारकों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।