2030 तक भारत की कोयला मांग 1.6 बिलियन टन होने का अनुमान

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 14-08-2026
India's coal demand seen at 1.6 bn tonnes by 2030 as govt pushes market-driven trade: Coal Secy
India's coal demand seen at 1.6 bn tonnes by 2030 as govt pushes market-driven trade: Coal Secy

 

मुंबई 
 
कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने शुक्रवार को कहा कि 2030 तक भारत में कोयले की मांग बढ़कर लगभग 1.6 अरब टन होने का अनुमान है। ऐसे में, जब देश कोयले की कमी वाली स्थिति से निकलकर सरप्लस (अतिरिक्त आपूर्ति) वाली स्थिति की ओर बढ़ रहा है, तो कोयले के व्यापार के लिए ज़्यादा कुशल और बाज़ार-आधारित तरीकों को अपनाने की ज़रूरत है। मुंबई में 'ग्लोबल कमोडिटी कॉन्क्लेव 2026' में बोलते हुए दत्त ने कहा कि कोयला एक्सचेंज खरीदारों और विक्रेताओं के लिए एक पारदर्शी बाज़ार बनाएगा और आगे चलकर कोयला डेरिवेटिव्स बाज़ार की नींव रखेगा।
 
उन्होंने कहा, "2030 तक कोयले की मांग बढ़कर 1.6 अरब टन होने का अनुमान है। ऐसे हालात में, जब देश कोयले की कमी से निकलकर सरप्लस की स्थिति में आ गया है, तो कोयले के व्यापार के लिए ज़्यादा कुशल, पारदर्शी और बाज़ार-आधारित तरीकों की ज़रूरत है।" सचिव ने बताया कि 2024-25 में घरेलू कोयला उत्पादन पहली बार 1 अरब टन के पार पहुंचा और 2025-26 में लगातार दूसरे साल भी यह स्तर बना रहा। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और बिना रुकावट ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने की उसकी क्षमता को दिखाती है।
 
इस पृष्ठभूमि में, सरकार कोयला एक्सचेंज के ज़रिए मौजूदा 'वन-टू-मेनी' (एक से अनेक) बिक्री मॉडल से हटकर 'मेनी-टू-मेनी' (अनेक से अनेक) ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ना चाहती है। उन्होंने कहा कि एक्सचेंज खरीदारों और विक्रेताओं को एक साथ बोली लगाने की सुविधा देगा, जिससे प्रतिस्पर्धी कीमतों का पता चल सकेगा और कोयला बिक्री के कई चैनलों को एक स्टैंडर्ड ट्रेडिंग फ्रेमवर्क में लाया जा सकेगा।
 
इससे कमर्शियल और कैप्टिव कोयला खनिकों को बड़े बाज़ार तक पहुंच मिलेगी और उपभोक्ता कई घरेलू उत्पादकों से कोयला खरीद सकेंगे, जिससे किसी एक सप्लायर पर निर्भरता कम होगी। सचिव ने कहा, "कोयला एक्सचेंज क्लियरिंग और सेटलमेंट के लिए एक केंद्रीय काउंटरपार्टी के तौर पर भी काम करेगा, जिससे खरीदारों और विक्रेताओं दोनों के लिए जोखिम प्रबंधन बेहतर होगा।"
 
उन्होंने आगे कहा कि यह प्लेटफॉर्म खरीदारों के लिए कोयले की अचानक या कम समय की ज़रूरतों को पूरा करना भी आसान बना सकता है। दत्त ने कहा कि आगे चलकर कोयला एक्सचेंज डेरिवेटिव्स बाज़ार के विकास में भी मदद कर सकता है, जिससे उत्पादक और उपभोक्ता कीमतों के जोखिम को मैनेज कर सकेंगे। उन्होंने कहा, "इससे सही समय पर भारत में कोयले से जुड़े डेरिवेटिव्स मार्केट के विकास की नींव भी पड़ेगी।" उन्होंने आगे कहा कि कोयला, फिजिकल और फाइनेंशियल कमोडिटी मार्केट के आपस में जुड़ने की प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा बन सकता है।
 
सेक्रेटरी ने कहा कि आने वाले महीनों में जब कोयला एक्सचेंज का ढांचा काम करना शुरू करेगा, तो सरकार एक्सचेंज, रेगुलेटर, मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थानों, फाइनेंशियल मध्यस्थों और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ मिलकर काम करेगी। उन्होंने कहा कि इस बड़े सुधार एजेंडे का मकसद ज़्यादा पारदर्शिता, तेज़ी से प्रोजेक्ट पूरा करना, प्राइवेट सेक्टर की ज़्यादा भागीदारी और एक ज़्यादा कुशल व आत्मनिर्भर कोयला इकोसिस्टम बनाना है।