संयुक्त राष्ट्र सुधार पर भारत का जोर, सुरक्षा परिषद में बदलाव की मांग

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 15-07-2026
India pushes for UN reforms, demands changes in the Security Council.
India pushes for UN reforms, demands changes in the Security Council.

 

न्यूयॉर्क

भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में व्यापक सुधार की अपनी मांग दोहराते हुए कहा है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप अब अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार टालना संभव नहीं है। भारत ने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में व्यापक सुधार, महासभा को अधिक प्रभावी बनाने और आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ईकोसॉक) की भूमिका को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत का कहना है कि यदि बहुपक्षीय व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप बनाना है तो संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा संरचना में बदलाव अनिवार्य है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा की अनौपचारिक बैठक के दौरान आयोजित "मेकिंग मल्टीलेटरलिज्म फिट फॉर द फ्यूचर" विषयक मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने कहा कि वैश्विक संस्थाओं को आज की वास्तविकताओं के अनुरूप बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद की व्यापक समीक्षा, महासभा के पुनरोद्धार और ईकोसॉक की मजबूत भूमिका के बिना सतत विकास और प्रभावी वैश्विक शासन की कल्पना अधूरी रहेगी।

राजदूत पर्वथनेनी ने कहा कि दुनिया पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े संकटों से गुजरी है। युद्ध, मानवीय संकट, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक अस्थिरता और क्षेत्रीय संघर्षों जैसी चुनौतियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान वैश्विक संस्थागत ढांचा इन समस्याओं से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम नहीं है। उनका कहना था कि संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता भी इसी कारण प्रभावित हुई है।

उन्होंने कहा कि दुनिया भर में संयुक्त राष्ट्र की छवि पर सबसे अधिक असर सुरक्षा परिषद की निष्क्रियता के कारण पड़ा है। विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों के दौरान सुरक्षा परिषद कई बार प्रभावी हस्तक्षेप करने में विफल रही, जिसके कारण लाखों लोगों को मानवीय संकट का सामना करना पड़ा। भारत का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना संयुक्त राष्ट्र की मूल जिम्मेदारी है, लेकिन मौजूदा ढांचा इस जिम्मेदारी को पूरी तरह निभाने में सफल नहीं रहा है।

भारत ने सुरक्षा परिषद की वर्तमान संरचना को भी पुराना बताते हुए कहा कि लगभग 80 वर्ष पहले तैयार किया गया संस्थागत ढांचा आज की दुनिया की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है। राजदूत पर्वथनेनी ने कहा कि 1940 के दशक की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई गई व्यवस्था 21वीं सदी की जटिल चुनौतियों का समाधान नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर वर्षों से केवल औपचारिक चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन ठोस प्रगति नहीं हो पाई है।

उन्होंने यह भी कहा कि अंतर-सरकारी वार्ता (Intergovernmental Negotiations-IGN) की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है, लेकिन अब तक यह मुख्य रूप से तैयार बयानों और औपचारिक चर्चाओं तक ही सीमित रही है। भारत का मानना है कि केवल चर्चा से काम नहीं चलेगा, बल्कि अब वास्तविक निर्णय और ठोस कार्रवाई की जरूरत है।

राजदूत पर्वथनेनी ने "पैक्ट फॉर द फ्यूचर" का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने इस दस्तावेज का रचनात्मक भावना के साथ समर्थन किया है, हालांकि सुरक्षा परिषद सुधार से जुड़े कुछ प्रावधानों पर भारत की गंभीर आपत्तियां भी रही हैं। उन्होंने कहा कि सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सभी सदस्य देशों को व्यावहारिक और परिणाम आधारित दृष्टिकोण अपनाना होगा।

भारत ने वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। राजदूत पर्वथनेनी ने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने के लिए विकासशील देशों को पर्याप्त, सुलभ और भरोसेमंद वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को अधिक प्रतिनिधिक, उत्तरदायी और विकासोन्मुख बनाया जाना चाहिए, ताकि वे बदलती वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का प्रभावी समाधान दे सकें।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया को ऐसी वैश्विक व्यवस्था की जरूरत है, जहां सभी देशों की आवाज सुनी जाए और निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक लोकतांत्रिक तथा समावेशी हो। भारत लंबे समय से विकासशील देशों और वैश्विक दक्षिण के हितों की आवाज उठाता रहा है और आगे भी यही भूमिका निभाता रहेगा।

अपने संबोधन के अंत में भारत ने स्पष्ट किया कि वह वैश्विक शासन संस्थाओं में सार्थक सुधार के लिए सभी ईमानदार प्रयासों का समर्थन करता रहेगा। भारत का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और अन्य वैश्विक संगठनों को इस तरह मजबूत बनाया जाना चाहिए कि वे वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें। भारत ने दोहराया कि संयुक्त राष्ट्र में सुधार केवल एक संस्थागत बदलाव नहीं, बल्कि अधिक न्यायपूर्ण, संतुलित और प्रभावी वैश्विक व्यवस्था की दिशा में आवश्यक कदम है।