नई दिल्ली
भारत और न्यूजीलैंड के बीच आज एक महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को बढ़ाना, निवेश को प्रोत्साहित करना और आर्थिक संबंधों को नई दिशा देना है।
मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दो या अधिक देशों के बीच ऐसी व्यवस्था होती है, जिसमें वे आपसी व्यापार पर लगने वाले सीमा शुल्क (टैरिफ) को कम या समाप्त करने पर सहमत होते हैं। इसके साथ ही व्यापार में आने वाली बाधाओं को भी कम किया जाता है, जिससे आयात-निर्यात और निवेश को बढ़ावा मिलता है।
भारत-न्यूजीलैंड FTA की बातचीत पहली बार 2010 में शुरू हुई थी, लेकिन 2015 में कई दौर की चर्चा के बाद यह रुक गई। इसके बाद मार्च 2025 में वार्ता फिर से शुरू हुई और दिसंबर 2025 में इसे अंतिम रूप दिया गया। अब 27 अप्रैल 2026 को इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे।
इस समझौते में व्यापार, सेवाएं, निवेश, सीमा शुल्क, विवाद निपटान और अन्य कानूनी प्रावधानों सहित कुल 20 अध्याय शामिल हैं। यह व्यापक समझौता दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को मजबूत करेगा।
भारत के लिए यह समझौता कई मायनों में फायदेमंद साबित हो सकता है। भारत के श्रम-प्रधान उद्योग जैसे कपड़ा, चमड़ा, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग उत्पाद न्यूजीलैंड में बिना शुल्क के प्रवेश कर सकेंगे। वहां का औसत आयात शुल्क पहले से ही कम (लगभग 2.3%) है, जिससे भारतीय निर्यातकों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
इसके अलावा, न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा किया है। इससे बुनियादी ढांचे, उद्योग और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होने की उम्मीद है।
सेवा क्षेत्र में भी भारत को बड़ा लाभ मिलेगा। आईटी, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, पर्यटन और पेशेवर सेवाओं में भारतीय कंपनियों और पेशेवरों के लिए नए अवसर खुलेंगे। खास बात यह है कि कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए एक नया वीजा मार्ग भी बनाया गया है, जिसके तहत एक समय में 5,000 लोगों को तीन साल तक काम करने की अनुमति मिल सकेगी।
दूसरी ओर, न्यूजीलैंड को भी इस समझौते से बड़ा लाभ मिलेगा। भारत ने करीब 70 प्रतिशत उत्पाद श्रेणियों में उसे बाजार तक पहुंच दी है। समझौते के लागू होते ही न्यूजीलैंड के 54 प्रतिशत से अधिक निर्यात पर भारत में शून्य शुल्क लगेगा। इसमें ऊन, कोयला, लकड़ी और भेड़ का मांस जैसे उत्पाद शामिल हैं।
कृषि उत्पादों जैसे सेब, कीवी और मनुका शहद पर भी शुल्क में छूट दी जाएगी, हालांकि इसके साथ कुछ शर्तें जैसे कोटा और न्यूनतम आयात मूल्य लागू रहेंगे।
हालांकि, भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा है। डेयरी उत्पाद, चीनी, सब्जियां, तांबा, एल्युमिनियम और हथियार जैसे क्षेत्रों में कोई शुल्क छूट नहीं दी गई है, ताकि किसानों और MSME सेक्टर पर नकारात्मक असर न पड़े।
यह समझौता भारत के लिए रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के एक विकसित और नियम-आधारित बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। वहीं न्यूजीलैंड को दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत में व्यापार और निवेश का अवसर मिलेगा।
द्विपक्षीय व्यापार की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच वस्तु व्यापार लगभग 1.3 अरब डॉलर रहा, जबकि कुल व्यापार (वस्तु और सेवाएं) 2.4 अरब डॉलर के करीब था। इस FTA के बाद इसमें और तेजी आने की उम्मीद है।