आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बुनियाद और लगातार हो रहे सुधारों पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि भारत दूसरे देशों को नुकसान पहुंचा कर नहीं, बल्कि सबकी समृद्धि के साथ अपनी वैश्विक आर्थिक भूमिका बढ़ाना चाहता है।
मोदी ने कहा, ‘‘हम किसी की कीमत पर विकास नहीं करते। हम दुनिया के साथ और दुनिया के लिए विकास करते हैं।’’
उन्होंने भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार में बाधाओं और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों तथा संसाधनों को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत को एक भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के रूप में पेश किया।
‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ को संबोधित करते हुए उन्होंने अप्रैल-जून तिमाही में देश की 7.8 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि, 700 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार और कराधान, दिवाला तथा श्रम कानूनों से जुड़े सुधारों का उल्लेख किया और कहा कि ये भारत की मजबूती को दर्शाते हैं।
मोदी ने कहा, ‘‘अनिश्चितताओं से भरी इस दुनिया में भारत भरोसे और स्थिरता का एहसास कराता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस साल अप्रैल-जून तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही। यह वृद्धि मजबूत बुनियाद पर हो रही है।’’
मोदी ने देश की मजबूत व्यापक आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का चालू खाते का घाटा 12-13 साल पहले चार प्रतिशत से अधिक था, जो अब घटकर करीब आधा प्रतिशत रह गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी देश की आर्थिक और प्रौद्योगिकी ताकत का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि उसके पास कितनी शक्ति है, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि वह दूसरों के लिए अवसर पैदा करने में अपनी ताकत का कितना प्रभावी इस्तेमाल करता है।