देहरादून:
भारत और वियतनाम ने समुद्री सुरक्षा तथा हाइड्रोग्राफी (समुद्री मानचित्रण) के क्षेत्र में अपने रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दोनों देशों के बीच हाइड्रोग्राफिक सहयोग पर दूसरे संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) की बैठक 10 से 12 जून 2026 तक उत्तराखंड के देहरादून स्थित राष्ट्रीय हाइड्रोग्राफिक कार्यालय में आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य समुद्री सहयोग, तकनीकी क्षमता निर्माण और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई गति देना था।
बैठक की संयुक्त अध्यक्षता वियतनाम पीपुल्स नेवी के उप प्रमुख रियर एडमिरल गुयेन थिएन क्वान और भारत के जॉइंट चीफ हाइड्रोग्राफर रियर एडमिरल प्यूश पॉसी ने की। दोनों पक्षों ने समुद्री मानचित्रण, नौवहन सुरक्षा और तकनीकी विशेषज्ञता के आदान-प्रदान से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
वियतनाम में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह कार्यक्रम राष्ट्रीय हाइड्रोग्राफिक कार्यालय, देहरादून में 10 से 12 जून तक आयोजित किया गया। दूतावास ने कहा कि दोनों देशों के वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारियों ने समुद्री सहयोग को और गहरा करने तथा भविष्य की संयुक्त परियोजनाओं पर विचार-विमर्श किया।
दूतावास ने अपने संदेश में कहा कि भारत और वियतनाम "एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप" के तहत समुद्री सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। विशेष रूप से हाइड्रोग्राफी और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में गहरे सहयोग के माध्यम से दोनों देश अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं।
हाइड्रोग्राफी समुद्री क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी विषय है, जिसके अंतर्गत समुद्र की गहराई, समुद्री तल की संरचना, नौवहन मार्गों और तटीय क्षेत्रों का अध्ययन एवं मानचित्रण किया जाता है। यह जानकारी सुरक्षित जहाज संचालन, बंदरगाह विकास, समुद्री व्यापार, रक्षा तैयारियों और आपदा प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक महत्व को देखते हुए भारत और वियतनाम के बीच इस प्रकार का सहयोग दोनों देशों की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करेगा। तकनीकी प्रशिक्षण, विशेषज्ञता साझा करने और आधुनिक हाइड्रोग्राफिक तकनीकों के उपयोग से क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा।
भारत और वियतनाम पिछले कई वर्षों से रक्षा और समुद्री सहयोग के क्षेत्र में लगातार अपने संबंधों का विस्तार कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच नौसैनिक अभ्यास, क्षमता निर्माण कार्यक्रम, रक्षा प्रशिक्षण और समुद्री सुरक्षा से जुड़े कई समझौते पहले भी हो चुके हैं। इस संयुक्त कार्य समूह की बैठक को उसी रणनीतिक साझेदारी की अगली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने भविष्य में संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों, तकनीकी सहयोग और विशेषज्ञों के आदान-प्रदान पर भी जोर दिया। इससे समुद्री मानचित्रण और नौवहन सुरक्षा से संबंधित आधुनिक तकनीकों के उपयोग में दोनों देशों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की रणनीति के तहत वियतनाम एक महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है। वहीं वियतनाम भी क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षित समुद्री मार्गों और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने में भारत के साथ सहयोग को प्राथमिकता देता है।
इस बैठक के माध्यम से दोनों देशों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वैज्ञानिक, तकनीकी और संस्थागत क्षमता निर्माण के जरिए दीर्घकालिक समुद्री साझेदारी विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सहयोग से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षित नौवहन, समुद्री अनुसंधान और रणनीतिक स्थिरता को भी नई मजबूती मिलेगी।