डिजिटलीकरण बढ़ने से साइबर सुरक्षा की कमजोरियों का खतरा बढ़ा: विशेषज्ञ

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 25-02-2026
Increasing digitization increases risk of cybersecurity vulnerabilities: Experts
Increasing digitization increases risk of cybersecurity vulnerabilities: Experts

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
अंतरराष्ट्रीय चुनाव संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाले विशेषज्ञों के एक समूह ने कहा है कि डिजिटलीकरण बढ़ने से साइबर सुरक्षा की कमजोरियों के प्रति खतरा बढ़ जाता है।
 
विशेषज्ञों ने कहा कि ‘‘बाहरी प्रौद्योगिकी तंत्र’’ पर निर्भरता और विशेषज्ञता तक असमान पहुंच संस्थागत स्वायत्तता को और कम करती हैं और अलग-अलग कार्यक्षेत्रों में अंतराल को बढ़ाती हैं।
 
उन्होंने ये बातें पिछले हफ्ते यहां निर्वाचन आयोग की प्रशिक्षण इकाई ‘इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट’ द्वारा ‘एआई और चुनाव: नवाचार, ईमानदारी और संस्थागत तैयारी’ विषय पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में कहीं।
 
संस्थान द्वारा साझा जानकारी के अनुसार, परिचर्चा में शामिल वक्ताओं ने यह राय व्यक्त की कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) चुनावी प्रशासन के लिए काफी उम्मीदें जगाता है।
 
उन्होंने कहा कि यदि एआई का इस्तेमाल विवेकपूर्ण तरीके से किया गया तो यह मतदाता सुगमता बढ़ा सकता है, कमजोर और वंचित समुदायों की पहुंच में विस्तार कर सकता है, साजोसामान और अभियान संबंधी योजनाओं को उन्नत कर सकता है, आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत कर सकता है और संस्थानों तथा नागरिकों के बीच संचार को आधुनिक स्वरूप प्रदान कर सकता है।
 
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों में ‘इंटरनेशनल आइडिया’ संगठन के कार्यक्रम प्रमुख अल्बर्टो फर्नांडीज गिबाजा, सहायक कार्यक्रम अधिकारी जूलियन मुलर, श्रीलंका के निर्वाचन आयोग की ओर से अमीर फैयाज, आईआईटी पलक्कड के एसोसिएट प्रोफेसर राघव मुथराजू और ‘क्रिएटिवबिट्स एआई’ के सह-संस्थापक सुमित तलवार शामिल थे।